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*मशरूम उत्पादन का हुनर बनेगा स्वरोजगार का आधार, प्रशिक्षण से खुलेंगी आजीविका की नई राहें*

*मशरूम उत्पादन का हुनर बनेगा स्वरोजगार का आधार, प्रशिक्षण से खुलेंगी आजीविका की नई राहें*

*राज्य शासन की मंशानुरूप ग्रामीणों को कौशल और स्वरोजगार से जोड़ने जिला प्रशासन की पहल*

*प्रशिक्षण के बाद नियमित मार्गदर्शन और बैंक ऋण से जोड़ने पर दिया जोर*

सारंगढ़–बिलाईगढ़, 30 सितंबर 2026। राज्य शासन की मंशानुरूप ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने और युवाओं एवं ग्रामीणों को कौशल आधारित आजीविका गतिविधियों से जोड़ने के लिए जिले में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। कलेक्टर श्रीमती पद्मिनी भोई साहू के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन द्वारा प्रशिक्षण के माध्यम से लोगों को हुनरमंद बनाकर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इसी कड़ी में ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान सारंगढ़–बिलाईगढ़ में 20 से 29 सितंबर तक आयोजित दस दिवसीय मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण कार्यक्रम का मूल्यांकन एवं समापन जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री ऋषिकेश तिवारी की उपस्थिति में किया गया।

प्रशिक्षण के समापन अवसर पर श्री तिवारी ने प्रशिक्षणार्थियों से सीधे संवाद कर दस दिनों में अर्जित ज्ञान और कौशल की जानकारी ली। उन्होंने मशरूम उत्पादन की प्रक्रिया, आवश्यक सामग्री, उत्पादन की तकनीक, लागत, संभावित आय और बाजार में बिक्री से जुड़े पहलुओं पर प्रशिक्षणार्थियों से चर्चा की। इस दौरान उन्होंने एक मशरूम बेड तैयार करने में आने वाली लागत, उससे प्राप्त होने वाले संभावित उत्पादन एवं आमदनी के संबंध में भी जानकारी ली और प्रशिक्षण में सीखी गई तकनीकों को स्वरोजगार के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित किया।

श्री तिवारी ने उन प्रशिक्षणार्थियों से भी चर्चा की, जो प्रशिक्षण लेने से पहले से ही मशरूम उत्पादन से जुड़े हुए हैं। उन्होंने जाना कि प्रशिक्षण के माध्यम से उन्हें अपने परंपरागत अनुभव के साथ कौन-कौन सी नई वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक जानकारियां मिलीं और इनका उपयोग उत्पादन एवं आय बढ़ाने में किस प्रकार किया जा सकता है। वहीं पहली बार मशरूम उत्पादन सीख रहे प्रतिभागियों से उत्पादन की प्रक्रिया, आवश्यक संसाधन, लागत और विपणन के संबंध में प्राप्त जानकारी पूछी तथा प्रशिक्षण के बाद स्वरोजगार शुरू करने की उनकी तैयारियों को जाना।

उन्होंने कहा कि कौशल प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण पूरा करना नहीं, बल्कि अर्जित हुनर को आजीविका में बदलना है। इसके लिए प्रशिक्षण के बाद भी प्रशिक्षणार्थियों के साथ नियमित संपर्क रखते हुए उन्हें आवश्यक मार्गदर्शन और सहयोग उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों की सतत सहायता करने तथा आवश्यकता के अनुसार उन्हें बैंक ऋण से जोड़ने के निर्देश दिए, जिससे पूंजी की आवश्यकता पूरी हो सके और प्रशिक्षणार्थी मशरूम उत्पादन की गतिविधि प्रारंभ कर अपनी आय बढ़ा सकें।

जिला प्रशासन द्वारा ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान के माध्यम से आयोजित इस प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को मशरूम उत्पादन की वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक तकनीकों के साथ उत्पादन लागत, प्रबंधन और विपणन की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के अंतिम चरण में प्रतिभागियों के अर्जित ज्ञान एवं कौशल का मूल्यांकन किया गया। दस दिवसीय प्रशिक्षण ने ग्रामीण क्षेत्र के प्रशिक्षणार्थियों को कम संसाधनों में मशरूम उत्पादन प्रारंभ कर स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने का व्यावहारिक आधार प्रदान किया।

समापन कार्यक्रम में जिला पंचायत की सहायक परियोजना अधिकारी श्रीमती संजू पटेल, ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान के निदेशक श्री रिपुसुदन यदु, उद्यमिता विकास कार्यक्रम के मूल्यांकन अधिकारी श्री संतोष शुक्ला, कौशल मूल्यांकनकर्ता श्री भोजराम यादव, संकाय सदस्य श्री अतुल कुमार मिश्रा, कार्यालय सहायक श्रीमती विमला पटेल, सुश्री मधु यादव, श्री उमेश बारेठ सहित संस्थान के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

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