
*कहानी बदलाव की : छोटी बचत से शुरू हुआ सफर, आटा-दाल चक्की ने शशिकला को बनाया आत्मनिर्भर*

*बिहान से मिला आर्थिक संबल, समूह से जुड़कर शशिकला ने खड़ा किया खुद का व्यवसाय*
*सेवा संकल्प अभियान में सामने आई बदलाव की कहानी, अब हर माह लगभग 9 हजार रुपए की हो रही आमदनी*
सारंगढ़–बिलाईगढ़, 30 सितंबर 2026। आत्मनिर्भर बनने के लिए शुरुआत हमेशा बड़ी पूंजी से हो, यह जरूरी नहीं। छोटी-छोटी बचत, मेहनत और आगे बढ़ने का संकल्प भी जीवन में बड़े बदलाव की नींव रख सकता है। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला विकासखंड के ग्राम बिलाईगढ़ की श्रीमती शशिकला साहू की कहानी इसी बदलाव की मिसाल है। कभी सामान्य आर्थिक परिस्थितियों के बीच परिवार की जरूरतें पूरी करने वाली शशिकला आज स्वयं की आटा और दाल चक्की संचालित कर परिवार की आय में मजबूत भागीदारी निभा रही हैं। सेवा संकल्प अभियान के बीच उनकी यह यात्रा शासन की योजना से मिले अवसर को अपनी मेहनत से आजीविका में बदलने की प्रेरक कहानी बनकर सामने आई है।
पति श्री रूपनारायण साहू के साथ परिवार की जिम्मेदारियां निभा रहीं शशिकला के मन में लंबे समय से अपनी आय का स्थायी साधन खड़ा करने की इच्छा थी। इसी सोच के साथ उन्होंने 11 सितंबर 2018 को दुर्गा स्वयं सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भरता की ओर पहला कदम बढ़ाया। शुरुआत बेहद सामान्य थी। उन्होंने समूह में हर महीने 100 रुपए की नियमित बचत शुरू की। छोटी राशि से शुरू हुई यही बचत आगे चलकर उनके स्वरोजगार की बुनियाद बनी।
*बिहान से मिला अवसर, गांव में शुरू की आटा चक्की*
छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़ने के बाद समूह की महिलाओं को बचत के साथ आर्थिक गतिविधियों की ओर आगे बढ़ने का अवसर मिला। नियमित बचत और समूह की गतिविधियों में अनुशासन के साथ भागीदारी के छह माह बाद बैंक द्वारा समूह को एक लाख रुपए का ऋण स्वीकृत हुआ। इस आर्थिक सहायता ने शशिकला के मन में स्वरोजगार के सपने को जमीन पर उतारने का रास्ता खोल दिया।
शशिकला ने ऋण से मिली राशि का उपयोग गांव में आटा चक्की स्थापित करने में किया। गांव में ही लोगों को गेहूं पिसाने की सुविधा मिलने लगी और शशिकला को अपने घर-परिवार के पास रहते हुए आमदनी का साधन मिल गया। शुरुआत में चक्की से उन्हें प्रतिदिन करीब 150 से 200 रुपए की आय होने लगी। नियमित आमदनी ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया और परिवार की रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने में भी सहारा मिलने लगा।
*पहली सफलता ने बढ़ाया हौसला, दूसरी मशीन लगाकर बढ़ाया कारोबार*

आटा चक्की से मिले अच्छे अनुभव ने शशिकला को व्यवसाय आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बैंक से दूसरी बार ऋण लेकर अपने काम का विस्तार किया और दाल तथा गेहूं की पिसाई के लिए अलग-अलग मशीनें स्थापित कीं। इससे गांव में उनकी सेवाओं का दायरा बढ़ा और आमदनी में भी वृद्धि हुई।
आज शशिकला अपने इस व्यवसाय से प्रतिदिन करीब 200 से 300 रुपए तक की कमाई कर रही हैं और उनकी मासिक आय लगभग 9 हजार रुपए तक पहुंच गई है। समूह में प्रतिमाह केवल 100 रुपए की बचत से शुरू हुआ उनका सफर आज नियमित स्वरोजगार में बदल चुका है। अपनी मेहनत से अर्जित यह आय न केवल परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मदद कर रही है, बल्कि शशिकला को अपने निर्णय स्वयं लेने और आगे बढ़ने का आत्मविश्वास भी दे रही है।
*सेवा से संकल्प और संकल्प से बदलाव की कहानी*

सेवा संकल्प अभियान में सामने आई शशिकला की कहानी बताती है कि योजना से मिला अवसर जब मेहनत और संकल्प से जुड़ता है, तो छोटी बचत भी स्वरोजगार की मजबूत नींव बन सकती है। अपने जीवन में आए बदलाव को साझा करते हुए श्रीमती शशिकला साहू कहती हैं, “बिहान योजना ने मेरे जीवन को नई दिशा दी है। इससे मुझे आर्थिक संबल के साथ आत्मनिर्भर होकर जीने का आत्मविश्वास भी मिला है। मैं बिहान योजना और छत्तीसगढ़ सरकार की हृदय से आभारी हूं।”
समूह की छोटी-सी बचत से शुरू होकर स्वयं का व्यवसाय स्थापित करने तक शशिकला का यह सफर अब गांव की दूसरी महिलाओं के लिए भी आत्मनिर्भरता की राह दिखा रहा है।


