
कहानी बदलाव की : मातृत्व के दिनों में थमी मजदूरी, ‘सेवा संकल्प’ से मिला सहारा तो कमला के चेहरे पर लौटी मुस्कान

रेजा मजदूर कमला साहू को मिनीमाता महतारी जतन योजना से मिले 20 हजार रुपए, नवजात की देखभाल और पोषण में मिली राहत
सारंगढ़–बिलाईगढ़,26 सितंबर 2026। कभी नवजात बच्चे की देखभाल और घर की जरूरतों के बीच आर्थिक चिंता से जूझ रही ग्राम पठारी की श्रीमती कमला साहू के लिए आज हालात कुछ बदले हुए हैं। रेजा मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करने वाली कमला के लिए मातृत्व का समय इसलिए भी कठिन था, क्योंकि बच्चे की देखभाल के लिए काम से दूर रहने पर रोज की मजदूरी प्रभावित हो रही थी। सीमित आमदनी में घर चलाना और नवजात के पोषण एवं स्वास्थ्य की जरूरतें पूरी करना उनके सामने चुनौती बनी हुई थी। इसी बीच ‘सेवा संकल्प अभियान’ के दौरान शासन की योजना का लाभ कमला तक पहुंचा और उनके कठिन समय में आर्थिक सहारा मिला।

छत्तीसगढ़ शासन के श्रम विभाग द्वारा संचालित मिनीमाता महतारी जतन योजना के अंतर्गत कमला साहू को 20 हजार रुपए की सहायता राशि सीधे उनके बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से प्राप्त हुई। उनके लिए यह राशि सिर्फ आर्थिक मदद नहीं थी, बल्कि उस समय मिली राहत थी, जब मजदूरी प्रभावित होने के कारण परिवार की आय सीमित हो गई थी। सहायता मिलने के बाद कमला अपने नवजात बच्चे के स्वास्थ्य और पोषण पर बेहतर ढंग से ध्यान दे पा रही हैं। बच्चे की जरूरतों को पूरा करने के साथ परिवार के जरूरी खर्चों को संभालने में भी इस राशि ने उनका साथ दिया।
कमला के जीवन में आया यह बदलाव ‘सेवा संकल्प अभियान’ के उस उद्देश्य को सामने लाता है, जिसमें शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाकर उनके जीवन में वास्तविक परिवर्तन लाने का प्रयास किया जा रहा है। कमला जैसी श्रमिक महिलाओं के लिए मातृत्व के दौरान आय का प्रभावित होना बड़ी चिंता बन सकता है। ऐसे समय में मिली आर्थिक सहायता परिवार को संभालने के साथ मां और बच्चे की बेहतर देखभाल का अवसर देती है।
कमला साहू बताती हैं कि रेजा मजदूरी से होने वाली सीमित आय में परिवार की जरूरतें पूरी करना आसान नहीं है। मातृत्व के समय काम पर नहीं जा पाने से उन्हें बच्चों की देखभाल और घर के खर्च को लेकर चिंता रहती थी। मिनीमाता महतारी जतन योजना से मिली 20 हजार रुपए की सहायता से बच्चे के पोषण और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को पूरा करने में बड़ी मदद मिली। उनके लिए यह सहायता कठिन समय में मिला ऐसा सहारा है, जिसने परिवार की चिंता कम की और बच्चों के भविष्य को लेकर भरोसा बढ़ाया।

कमला की कहानी बदलाव की उस तस्वीर को सामने लाती है, जहां शासन की योजना का लाभ मिलने के बाद आर्थिक चिंता के बीच जी रही एक श्रमिक मां को अपने बच्चे की बेहतर देखभाल का अवसर मिला। रेजा मजदूरी से परिवार चलाने वाली कमला आज भी मेहनत कर रही हैं, लेकिन मातृत्व के उस कठिन दौर में मिली आर्थिक सहायता ने उनके जीवन में राहत का एक महत्वपूर्ण आधार जोड़ा है।


