छत्तीसगढ़रायपुर

सेवा की कहानी : बिहान से बदली जिंदगी की राह, बैंक सखी बनकर आत्मनिर्भर हुईं दीपिका

रायपुर : सेवा की कहानी : बिहान से बदली जिंदगी की राह, बैंक सखी बनकर आत्मनिर्भर हुईं दीपिका

बेटियों का भविष्य संवारने में मिल रही मदद

ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण और लखपति दीदी की संकल्पना को दे रहीं मजबूती

रायपुर, 04 अक्टूबर 2026

केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं एवं महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़कर महिलाएं आज स्वरोजगार के साथ-साथ बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और शासकीय योजनाओं का लाभ ग्रामीणों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। कोण्डागांव जिले के मर्दापाल क्षेत्र के ग्राम ज्ञान हसलनार की रहने वाली दीपिका देवांगन ऐसी ही महिला हैं, जिन्होंने बिहान से जुड़कर आत्मनिर्भरता की राह में अपनी पहचान बनाई है।

दीपिका वर्ष 2018 में किशोरी कन्या स्व-सहायता समूह से जुड़ीं। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आर्थिक गतिविधियों के साथ आगे बढ़ने और अपनी क्षमताओं को पहचानने का अवसर मिला। वर्ष 2019 से वे बैंकिंग सखी के रूप में कार्य कर रही हैं। गांव में ही बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराकर वे ग्रामीणों के लिए सुविधा का महत्वपूर्ण माध्यम बनी हैं।

12 करोड़ रुपये से अधिक का किया लेन-देन

दीपिका अब तक बैंकिंग सखी के रूप में लगभग 12 करोड़ रुपये का लेन-देन कर चुकी हैं। उनके माध्यम से ग्रामीणों और विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को गांव में ही राशि आहरण सहित बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं। इससे विशेष रूप से दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को बैंक तक आने-जाने में लगने वाले समय और खर्च से राहत मिली है।

बैंकिंग सेवाओं के साथ दीपिका ग्रामीणों को प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना सहित विभिन्न शासकीय योजनाओं एवं वित्तीय सेवाओं की जानकारी और सुविधा भी उपलब्ध करा रही हैं। इस तरह वे स्वयं आर्थिक रूप से आगे बढ़ने के साथ ग्रामीण परिवारों को भी वित्तीय रूप से जागरूक और सशक्त बनाने में योगदान दे रही हैं।

9 से 12 हजार रुपये मासिक आय से मजबूत हुआ परिवार

बैंकिंग सखी के रूप में कार्य करते हुए दीपिका को प्रतिमाह लगभग 9 से 12 हजार रुपये तक का कमीशन प्राप्त होता है। इस आय ने उन्हें अपने परिवार की आर्थिक जरूरतों में योगदान देने और अपनी बेटियों के भविष्य के लिए बचत करने का आत्मविश्वास दिया है।

दीपिका अपनी दोनों बेटियों के नाम पर सुकन्या समृद्धि योजना के तहत प्रत्येक बेटी के लिए प्रतिमाह 3,500 रुपये जमा कर रही हैं। इसके साथ ही उन्होंने अपनी बेटियों के नाम पर 50 हजार रुपये की आरडी भी करवाई है। उनकी यह पहल बेटियों के सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य के प्रति उनकी जागरूकता को दर्शाती है।

आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही हैं दीपिका

वह बताती हैं कि बिहान स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनके भीतर आत्मविश्वास बढ़ा है। समूह से जुड़ने और बैंकिंग सखी के रूप में कार्य करने से उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर मिला। आज वे परिवार की आजीविका में सहयोग देने के साथ-साथ गांव के लोगों को आवश्यक बैंकिंग और शासकीय सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं।

महिला स्व-सहायता समूहों को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने, वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार के प्रयासों का दीपिका का सफर एक जीवंत उदाहरण है। उनकी मेहनत और निरंतर प्रयास ‘लखपति दीदी’ की संकल्पना को मजबूत करते हुए ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक स्वावलंबन की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

 

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!