छत्तीसगढ़सारंगढ़

योहिनापाली के नीलाम्बर की बदली जिंदगी, 10 से बढ़कर 65 लीटर हुआ दूध उत्पादन

योहिनापाली के नीलाम्बर की बदली जिंदगी, 10 से बढ़कर 65 लीटर हुआ दूध उत्पादन

राष्ट्रीय कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम से पशुओं का नस्ल सुधार, बढ़ी आमदनी ने परिवार को बनाया आर्थिक रूप से मजबूत

सारंगढ़, 27 सितंबर 2026। ग्राम योहिनापाली, तहसील सारंगढ़ निवासी श्री नीलाम्बर पटेल के लिए पशुपालन अब केवल रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने का जरिया नहीं रहा, बल्कि परिवार की आर्थिक मजबूती का आधार बन गया है। कुछ वर्ष पहले उनके पास छह देशी नस्ल की गायें थीं, जिनसे प्रतिदिन 10 से 15 लीटर दूध ही मिल पाता था। कम उत्पादन के कारण आमदनी भी सीमित थी। राष्ट्रीय कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम का लाभ लेने और पशुपालन विभाग के मार्गदर्शन से उनके पशुधन में नस्ल सुधार हुआ और देखते ही देखते दूध उत्पादन में कई गुना वृद्धि हो गई।

नीलाम्बर ने अपनी गायों में कृत्रिम गर्भाधान कराया। इसके परिणामस्वरूप उनके पशुधन में उन्नत नस्ल के पशु शामिल हुए। वर्तमान में उनके पास 2 एच.एफ. क्रॉसब्रीड और 4 जर्सी क्रॉसब्रीड दुग्धारू गायें हैं। कृत्रिम गर्भाधान से प्राप्त जर्सी क्रॉसब्रीड बछिया भी उनके पशुधन का हिस्सा है, जिसे वे आने वाले समय में अपने डेयरी व्यवसाय के विस्तार की उम्मीद के रूप में देखते हैं।

उन्नत नस्ल की गायों से अब प्रतिदिन लगभग 60 से 65 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। नीलाम्बर दूध को स्थानीय निजी होटलों और ग्राहकों को लगभग 50 रुपए प्रति लीटर की दर से बेचते हैं। इससे प्रतिदिन करीब 2,400 से 2,600 रुपए की आमदनी होती है। मासिक आय लगभग 72 हजार से 78 हजार रुपए तथा वार्षिक आय करीब 8.76 लाख से 9.36 लाख रुपए तक पहुंच गई है। इस बढ़ी हुई आय ने परिवार की आर्थिक स्थिति को पहले की तुलना में काफी मजबूत किया है।

नीलाम्बर बताते हैं कि पहले सीमित आमदनी में परिवार की जरूरतों को पूरा करना चुनौतीपूर्ण था। अब दूध की नियमित बिक्री से घर में आय का स्थायी जरिया बना है। बच्चों की शिक्षा, खेती में निवेश और परिवार की दूसरी आवश्यकताओं के लिए खर्च करना आसान हुआ है। मेहनत का प्रतिफल अब सीधे परिवार के जीवन में दिखाई देता है।

पशुपालन विभाग की सेवाओं से भी इस बदलाव को निरंतर सहारा मिल रहा है। पशुओं को समय-समय पर टीकाकरण, कृमिनाशन, जूं-नाशन, पशु चिकित्सा उपचार, रोग नियंत्रण और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाता है। इससे पशुओं के स्वास्थ्य की बेहतर देखभाल हो रही है और दुग्ध उत्पादन को बनाए रखने में मदद मिल रही है।

नीलाम्बर ने पशुपालन को खेती से भी जोड़ा है। पशुओं से प्राप्त गोबर से जैविक खाद तैयार कर खेतों में उपयोग किया जा रहा है, जिससे रासायनिक उर्वरकों पर होने वाला खर्च कम हुआ है और भूमि की उर्वरता बनाए रखने में मदद मिल रही है। इस तरह एक ही पशुधन से दूध के साथ खेती के लिए उपयोगी जैविक खाद भी मिल रही है।

श्री नीलाम्बर पटेल कहते हैं कि राष्ट्रीय कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम ने उनके पशुपालन को नई दिशा दी है। उन्नत नस्ल के पशुओं से बढ़ा दूध उत्पादन उनकी आय में वृद्धि का कारण बना और इसी के साथ परिवार की आर्थिक स्थिति भी बदलती चली गई। योहिनापाली के नीलाम्बर की यह कहानी बताती है कि सही तकनीक, विभागीय मार्गदर्शन और निरंतर मेहनत के साथ पशुपालन ग्रामीण परिवारों के लिए स्थायी आमदनी और आत्मनिर्भरता का मजबूत माध्यम बन सकता है।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!