*‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान से जल संरक्षण को बढ़ावा*
*वीबीजीरामजी के जल संरक्षण एवं संवर्धन कार्यों से होगी भू-जल स्तर में वृद्धि*
सारंगढ़-बिलाईगढ़, 17 अगस्त 2026/भू-जल स्तर के संरक्षण एवं संवर्धन तथा ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट की समस्या के स्थायी समाधान के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा ‘मोर गांव-मोर पानी’ महाअभियान के तहत व्यापक स्तर पर जल संरक्षण एवं जल संवर्धन के कार्य कराए जा रहे हैं। विकसित भारत जीरामजी योजना के माध्यम से वर्षा ऋतु में व्यर्थ बह जाने वाले पानी को विभिन्न जल संरचनाओं के जरिए संरक्षित कर कृषि एवं प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन को मजबूत किया जा रहा है।

कलेक्टर पदमिनी भोई साहू के निर्देशन एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत ऋषिकेश तिवारी के मार्गदर्शन में जिले की ग्राम पंचायतों में जल संरक्षण से संबंधित विभिन्न कार्यों को प्राथमिकता के साथ स्वीकृति प्रदान कर उनका क्रियान्वयन कराया जा रहा है। इसके तहत बड़ी संख्या में डबरी, चेकडैम, नवीन तालाब, तालाब गहरीकरण सहित अन्य जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है। इसके साथ ही रेन वाटर हार्वेस्टिंग, सैंड वाटर फिल्टर, रिचार्ज पिट जैसी संरचनाओं के माध्यम से वर्षा जल को संरक्षित कर भू-जल स्तर को बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
*359 डबरियों से सिंचाई और रोजगार को बढ़ावा*
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में वित्तीय वर्ष के दौरान हितग्राहीमूलक 359 डबरियों का निर्माण कराया गया है। इन कार्यों से ग्रामीण परिवारों को रोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं। वहीं डबरियों में संरक्षित पानी का उपयोग सिंचाई के लिए किए जाने से किसानों को फसल उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी। इसी प्रकार 119 तालाबों के गहरीकरण का कार्य कराया गया है, जिससे तालाबों की जलधारण क्षमता में वृद्धि हुई है। वहीं 59 नवीन तालाबों का निर्माण कराया गया है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण के साथ-साथ रोजगार के अवसर भी सृजित हुए हैं और निस्तारी की समस्या के समाधान में मदद मिलेगी।
*चेकडैम से रोका जा रहा वर्षा जल*
बारिश के दौरान नालों एवं जल प्रवाह के माध्यम से बड़ी मात्रा में पानी व्यर्थ बह जाता था। इस पानी को रोककर उपयोग में लाने के उद्देश्य से रोजगार गारंटी योजना एवं वीबीजीरामजी योजना के माध्यम से जिले में 94 चेकडैम का निर्माण कराया गया है। इन चेकडैम के माध्यम से वर्षा जल को रोककर सिंचाई के लिए उपयोग किया जा रहा है। इससे कृषि उत्पादन को बढ़ावा मिलने के साथ भू-जल स्तर में वृद्धि होगी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण भी हो रहा है। जल संरक्षण की दिशा में किए जा रहे इन कार्यों को लेकर ग्रामीणों में भी सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
*वाटर कोर्स एवं फीडर चैनल से जल संरचनाओं तक पहुंच रहा पानी*
सिंचाई नालियों एवं प्राकृतिक जल प्रवाह के माध्यम से व्यर्थ बहने वाले पानी को संरक्षित करने के लिए जिले में 215 वाटर कोर्स एवं फीडर चैनल (कच्ची एवं पक्की नालियों) का निर्माण कराया गया है। इन चैनलों के माध्यम से पानी को तालाब एवं अन्य जल संरचनाओं तक पहुंचाया जा रहा है। इसके अलावा 59 गैबियन स्ट्रक्चर का निर्माण किया गया है, जिससे मिट्टी के कटाव को रोकने और पानी के बहाव की गति को कम करने में मदद मिल रही है। वहीं 31 डाइक निर्माण के माध्यम से सतही रूप से बहने वाले पानी को रोकने का कार्य किया जा रहा है। जिले में 22 कुओं का निर्माण, 38-40 मॉडल, कंटूर ट्रेंच, 110 रिचार्ज पिट, 10 डब्ल्यूएटी तथा 27 रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाओं सहित अन्य जल संरक्षण कार्यों को भी स्वीकृति प्रदान की गई है। इन संरचनाओं को जल संरक्षण के दृष्टिकोण से एकीकृत रूप से विकसित किया जा रहा है, ताकि वर्षा जल को अधिक से अधिक मात्रा में भूमि में पहुंचाकर भू-जल स्तर को रिचार्ज किया जा सके।
*जल संरक्षण से कृषि उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा*
‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान के तहत जल संरक्षण की दिशा में किए जा रहे इन कार्यों से एक ओर जहां वर्षा जल का बेहतर प्रबंधन होगा, वहीं दूसरी ओर भू-जल स्तर में सुधार, सिंचाई सुविधा का विस्तार और कृषि उत्पादन में वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर सृजित होने के साथ स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण भी होगा। जिले में जल संरक्षण एवं संवर्धन के लिए किए जा रहे ये प्रयास ‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान को धरातल पर प्रभावी बनाने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों को जल-सुरक्षित एवं कृषि की दृष्टि से अधिक सक्षम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।



