छत्तीसगढ़

सेवा की कहानी : सेवा संकल्प अभियान में सामने आई प्रियंका की कहानी, तेंदूपत्ता की बढ़ी दर से चेहरे पर आई खुशी

एमसीबी : सेवा की कहानी : सेवा संकल्प अभियान में सामने आई प्रियंका की कहानी, तेंदूपत्ता की बढ़ी दर से चेहरे पर आई खुशी

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बचपन से तेंदूपत्ता संग्रहण कर रहीं ग्राम बेलबहरा की प्रियंका को इस वर्ष मिला मेहनत का बेहतर पारिश्रमिक

एमसीबी/06 अक्टूबर 2026

सेवा संकल्प अभियान 2026 के अंतर्गत शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं एवं निर्णयों से आम नागरिकों के जीवन में आए बदलाव की कहानियां सामने आ रही हैं। इसी कड़ी में मनेन्द्रगढ़ विकासखंड के ग्राम बेलबहरा निवासी प्रियंका की कहानी सामने आई है, जिनके लिए तेंदूपत्ता संग्रहण बचपन से ही आजीविका का महत्वपूर्ण साधन रहा है।

प्रियंका बताती हैं कि वह बचपन में अपने माता-पिता के साथ जंगल जाकर तेंदूपत्ता तोड़ने जाया करती थीं। बचपन से शुरू हुआ यह कार्य आज भी उनके जीवन का हिस्सा बना हुआ है। वर्षों से तेंदूपत्ता संग्रहण का कार्य कर रहीं प्रियंका के लिए इस वर्ष का सीजन विशेष खुशी लेकर आया।

राज्य शासन द्वारा तेंदूपत्ता संग्रहण की पारिश्रमिक दर बढ़ाकर 5,500 रुपये प्रति मानक बोरा किए जाने से संग्राहकों को अपनी मेहनत का बेहतर मूल्य मिल रहा है। प्रियंका का कहना है कि तेंदूपत्ता संग्रहण में काफी मेहनत लगती है। जंगल जाकर दिनभर पत्ते एकत्र करना और उन्हें निर्धारित तरीके से तैयार करना आसान काम नहीं है। ऐसे में मेहनत के बदले बेहतर पारिश्रमिक मिलना उनके लिए खुशी की बात है।

प्रियंका बताती हैं कि तेंदूपत्ता संग्रहण से मिलने वाली राशि उनके लिए आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण है। बढ़ी हुई संग्रहण दर से उन्हें अपनी मेहनत का उचित मूल्य मिलने का एहसास हुआ है। वह कहती हैं कि इस वर्ष तेंदूपत्ता संग्रहण से मिलने वाले बेहतर पारिश्रमिक ने उनके उत्साह को बढ़ाया है।

प्रियंका इस पहल के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करती हैं। उनका कहना है कि तेंदूपत्ता संग्राहकों के पारिश्रमिक में वृद्धि से जंगल पर निर्भर परिवारों को अपनी मेहनत का बेहतर मूल्य मिल रहा है और उन्हें आर्थिक संबल प्राप्त हो रहा है।

सेवा संकल्प अभियान 2026 के माध्यम से शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी पहलों से लोगों के जीवन में आए बदलाव और लाभार्थियों के अनुभवों को सामने लाया जा रहा है। प्रियंका की कहानी भी इसी बदलाव की एक तस्वीर है, जहां बचपन से तेंदूपत्ता संग्रहण का कार्य कर रहीं एक महिला को अपनी मेहनत का बेहतर पारिश्रमिक मिलने से खुशी और आर्थिक संबल मिला है।

तेंदूपत्ता संग्रहण छत्तीसगढ़ के वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले अनेक परिवारों की आजीविका का महत्वपूर्ण आधार है। पारिश्रमिक में वृद्धि से ऐसे परिवारों को अपनी मेहनत का बेहतर प्रतिफल मिलने की उम्मीद मजबूत हुई है। प्रियंका के लिए यह केवल बढ़ी हुई राशि नहीं, बल्कि वर्षों से किए जा रहे श्रम के बेहतर सम्मान और आर्थिक मजबूती की अनुभूति है।

 

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