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वैज्ञानिक खेती एवं जल संरक्षण तथा संतुलित उर्वरक उपयोग पर जोर देने कलेक्टर ने की अपील

वैज्ञानिक खेती एवं जल संरक्षण तथा संतुलित उर्वरक उपयोग पर जोर देने कलेक्टर ने की अपील

 

सारंगढ़ बिलाईगढ़, 27 जून 2026/खरीफ 2026 में अल- नीनो के संभावित प्रभाव के कारण मानसून के देरी से आने, शीघ्र समाप्त होने तथा फसल अवधि के दौरान वर्षा में लंबे अंतराल, खण्ड वर्षा की संभावना को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू ने किसानों से अधिक अवधि वाली धान के किस्मों के स्थान पर कम अवधि में पकने वाली किस्मों जैसे एमटीयू 1010, विक्रम टीसीआर, एमटीयू- 1156, एमटीयू- 1153, छ.ग. देवभोग का चयन करने की अपील की है। साथ ही दलहन-तिलहन फसलों का रकबा बढ़ाने, फसल विविधीकरण अपनाने तथा उपलब्ध जल संसाधनों का समुचित उपयोग एवं संतुलित उर्वरक, नैनो यूरिया, नैनो डी.ए.पी. का उपयोग करने पर विशेष बल दिया गया हैं। इससे जल संरक्षण के साथ-साथ फसलों की उत्पादकता एवं आय में भी वृद्धि होगी। किसान वैज्ञानिक खेती एवं जल संरक्षण को बढ़ावा दें। खरीफ 2026 में कृषक भाई खेती में कतार बोनी, एसआरआई पद्धति, ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई को अपनाये। जो कम पानी में अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए आधुनिक कृषि है। कृषक खेतों में मेडबंदी कर उपलब्ध जल का अधिकतम उपयोग करें। जल संरक्षण हेतु खेत में तालाब, मेडबंदी, नलकूप रिचार्ज, सोकपिट निर्माण एवं वर्षा जल संचयन जैसी गतिविधियों को अपनाकर फसलों की उत्पादन सुनिश्चित की जा सकती है।

 

कम वर्षा की संभावना को देखते हुए धान की कतार बोनी को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इस पद्धति से लगभग 20 प्रतिशत तक पानी की बचत होती है। उत्पादन लागत कम आती है तथा फसल लगभग 12 से 15 दिन पहले तैयार हो जाती है। वहीं कतार पद्धति से बुवाई करने पर खरपतवार नियंत्रण, पौधों की समान वृद्धि एवं नमी संरक्षण में सहायता मिलती है।

 

प्रशिक्षण एवं बैठकों के माध्यम से किसानों को बीजोपचार अपनाने की सलाह दी जा रही है। धान फसल के लिए एजोस्पिरिलम, पीएसबी तथा दलहनी फसलों के लिए राइजोबियम एवं अन्य जैव उर्वरकों के उपयोग से फसलों की वृद्धि एवं उत्पादकता बढ़ाई जा सकती है एवं साथ ही उच्चहन भूमि वाले क्षेत्रों में धान के स्थान पर अरहर, उडद, मूंग, तिल एवं मूंगफली जैसी फसलों को अपनाने की सलाह दी जाती है। अल-नीनो की संभावित प्रभाव को देखते हुए कम एवं मध्यम अवधि में पकने वाली फसलो के किस्मों का चयन करें तथा कृषक संतुलित उर्वरक एवं नैनो यूरिया, नैनो डीएपी का उपयोग करें। साथ की जैविक खाद, दवाई का उपयोग करें। राज्य शासन की कृषक उन्नति योजना के तहत दलहन एवं तिलहन फसलों की खेती करने वाले किसानों को 10 हजार रुपये प्रति एकड़ तथा धान के स्थान पर अन्य वैकल्पिक फसलों की खेती करने पर 15 हजार रुपये प्रति एकड़ तक प्रोत्साहन राशि प्रदान किए जाने का प्रावधान है। इस योजना का लाभ उठाकर अपनी आय में वृद्वि कर सकते है।

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