भटगांव सहित आसपास क्षेत्र मे बाजे गाजे के साथ हुआ भोजली विसर्जन है,
भटगांव एवं धोबनी में भोजली विसर्जन के साथ भाई-बहन के प्रेम पर्व का समापन, तालाबों में उमड़ी भीड़
भटगांव में गूंजा भोजली गीत, महिलाओं ने लोकगीतों से बांधा समा
भटगांव, रक्षाबंधन के दूसरे तीसरे दिन नगर सहित ग्रामीण अंचलों में भोजली विसर्जन का पर्व परंपरागत उत्साह के साथ मनाया गया। भटगांव एवं धोबनी मे सामूहिक भोजली विसर्जन करते हुए महिलाओ ने एकजुटता का परिचय दिया जहाँ बहनों ने गेहूं से उगाई गई भोजली को भाइयों के कानों में लगाकर उनकी लंबी उम्र की कामना की और भाइयों ने बहनों को उपहार व नेग दिया।

बाजे गाजे कीर्तन एवं डी जे के साथ देवी गंगा देवी गंगा भोजली गीत गाते हुए नगर का भ्रमण करते हुए तालाब विसर्जन के लिए पहुंची जहाँ मुख्य तालाब में दोपहर 3 बजे से शाम तक विसर्जन के लिए भीड़ लगी रही।

मान्यता है कि सावन में बोई गई भोजली समृद्धि और अच्छे मित्रता का प्रतीक है। भाई-बहन एक-दूसरे को भोजली देकर कहते हैं – _’भोजली के बदले में गंगा-जमुना के पानी जैसा प्रेम बना रहे’_
भटगांव में गूंजा भोजली गीत, महिलाओं ने लोकगीतों से बांधा समा
छत्तीसगढ़ के लोक पर्व भोजली पर नगर में लोक संस्कृति की झलक देखने को मिली। महिलाओं ने पारंपरिक वेश में समूह बनाकर भोजली का आदान-प्रदान किया।

युवतियों ने बताया कि 15 दिन पहले राखी के साथ टोकनी में गेहूं बोया था, जो आज 3-4 इंच की भोजली बन गई। इसे भाई के कान पर लगाकर उसकी तरक्की की दुआ की जाती है।
नगर पंचायत अध्यक्ष विक्रम कुर्रे सहित कई जनप्रतिनिधियों ने भी लोगों को भोजली पर्व की शुभकामनाएं दीं।



