*शिव महापुराण कथा में शिव-पार्वती विवाह प्रसंग का वर्णन: श्रद्धालु भावविभोर हुए, अद्भुत झांकियों के दर्शन कराए गए*
▪️ शिव पार्वती विवाह प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। हर हर महादेव और जय माता पार्वती के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया
भटगांव-समस्त नगरवासियों की ओर से आयोजित श्री शिव महापुराण कथा एवं महारुद्राभिषेक के नवम दिवस पार्वती जन्मोत्सव और
शिव-पार्वती विवाह प्रसंग सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु
कथा व्यास श्री श्री 1008 श्री पवन कुमार महराज जी ने सती के पुनर्जन्म से लेकर भगवान शिव से विवाह तक की कथा सुनाकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। उन्होंने बताया कि सती के देह त्याग के बाद भगवान शिव ध्यान में लीन हो गए। वहीं तारकासुर के अत्याचार से देवताओं को मुक्त कराने के लिए जगदंबा ने पर्वतराज हिमालय और माता मैना के घर पार्वती के रूप में जन्म लिया। नारद जी की प्रेरणा से माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की।उनकी अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें वरदान दिया। कथा में शिव-पार्वती विवाह का प्रसंग सुनाते हुए महाराज ने बताया कि भगवान शिव भूत-प्रेत, नंदी और गणों के साथ बारात लेकर हिमालय की नगरी पहुंचे। धूमधाम से विवाह संपन्न हुआ। उन्होंने कहा कि शिव-पार्वती विवाह ज्ञान, वैराग्य और भक्ति के समन्वय का प्रतीक है। कथा के अंत में रुद्राक्ष की महिमा का वर्णन किया गया। उन्होंने कहा कि रुद्राक्ष भगवान शिव के अश्रुओं से प्रकट हुआ शिव स्वरूप माना जाता है। कथा वाचक ने भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह प्रसंग का वर्णन किया इस दौरान शिव विवाह की अद्भुत झांकियां प्रस्तुत की गई जिन्हें देखकर श्रद्धालु भाव विभोर हो उठे पूरा परिषर “भगवान भोलेनाथ” की जय घोष से गूंज उठा। कथा वाचक श्री श्री 1008 श्री पवन कुमार महराज जी ने भगवान शिव की पूजा के महत्व पर भी प्रकाश डाला उन्होंने शिव महापुराण के अनुसार शिव आराधना के दौरान छह प्रमुख बातों का विशेष महत्व बताया इसमें शिव जी का अभिषेक आत्मशुद्धि के लिए गंध या चंदन का लेपन पुण्य प्राप्ति के लिए नैवेद्य अर्पित करना संतुष्टि एवं आयु वृद्धि के लिए धूप दिखाना धन समृद्धि के लिए दीप अर्पित करना संतुष्टि एवं आयु वृद्धि के लिए धूप दिखाना धन समृद्धि के लिए दीप अर्पित करना ज्ञान प्राप्ति के लिए तांबूल (पान) चढ़ाना सांसारिक सुख समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है आज की कथा में इनकी रही उपस्थिति शिक्षक पंकज दुबे, पुष्पराज केसरवानी, दुर्गेश केसरवानी, प्रवेश दुबे, राममनोहर गुप्ता, अनुराग पवन दुबे, डाक्टर तुलेश्वर वैष्णव, दीपक केसरवानी, बदरा बाई सरदार, रमेश केसरवानी सहित भारी संख्या मे श्रद्धालुगण उपस्थित रहे.






