

प्रदेश के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में ईडब्ल्यूएस यानी गरीब सवर्णों के लिए सीटें ही नहीं है। महासमुंद कॉलेज को शुक्रवार को एमबीबीएस कोर्स में ईडब्ल्यूएस की 25 सीटें मिल गई हैं। इससे प्रदेश में एमबीबीएस की 25 सीटें बढ़ गई हैं। अब एमबीबीएस की कुल सीटें 1745 हो गई हैं। दूसरी ओर कोरबा व दुर्ग के कॉलेजों में इस कोटे की 55 सीटों का इंतजार है। उम्मीद की जा रही है कि दोनों ही कॉलेजों को जल्द गरीब सवर्ण कोटे की सीटें मिल जाएंगी। सीटें नहीं होने के कारण ईडब्ल्यूएस के पात्र छात्रों को अनारक्षित केटेगरी से एडमिशन लेने की मजबूरी है। इसमें एक-एक अंक के लिए स्पर्धा है। यही कारण है कि कई छात्र एडमिशन से वंचित हो रहे हैं।
प्रदेश में 10 सरकारी मेडिकल कॉलेजों का संचालन हो रहा है। इसमें सभी में एमबीबीएस कोर्स तथा 6 कॉलेजों में पीजी कोर्स का संचालन हो रहा है। नए सत्र के लिए महासमुंद, कोरबा कॉलेजों को 100-100 तथा दुर्ग को 150 एमबीबीएस सीटों के लिए मान्यता मिली है। महासमुंद व काेरबा को ईडब्ल्यूएस की 25-25 सीटें मिलनी है, जिसमें केवल एक कॉलेज को मिली है। दो दिन पहले दुर्ग स्थित कॉलेज को मान्यता मिली है।
वहां ईडब्ल्यूएस की 30 सीटें मिलनी हैं, जो नहीं मिली है। यही कारण है कि दो कॉलेजों में गरीब सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण नहीं मिल पाएगा। ऐसे छात्रों को अनारक्षित कोटे से सीटें मिलेंगी। यह तभी होगा, जब छात्रों की रैंक अच्छी हो। यानी नीट यूजी में अच्छे अंक मिले हो। सीटें मिलने पर आय के आधार पर आरक्षण मिलने से उनका एडमिशन आसानी से हो जाता है।

पहले की तुलना में कट आफ गिर रहा, छात्रों को फायदा
जब प्रदेश का गठन हुआ, तब केवल रायपुर में मेडिकल कॉलेज था। अब सरकारी मेडिकल कॉलेजों की संख्या 10 व निजी की तीन है। अगले साल और सरकारी कॉलेज बढ़ जाएंगे। मेडिकल कॉलेज रायपुर से पढ़े सीनियर कैंसर सर्जन डॉ. युसूफ मेमन व हिमेटोलॉजिस्ट डॉ. विकास गोयल का कहना है कि पहले एक ही कॉलेज होने से कंपीटिशन बहुत था। प्रदेश के कॉलेज में मुश्किल से एडमिशन होता था। अब कॉलेज व सीटों की संख्या बढ़ने से कट आफ मॉर्क्स काफी गिरा है। सीटें बढ़ने से आने वाले दिनों में कट आफ और गिरेगा। इससे छात्रों का ही फायदा होगा। कॉलेज बढ़ने के बाद मेडिकल एजुकेशन की क्वालिटी पर ध्यान रखना होगा।
पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स में रायपुर और बिलासपुर में ही सीटें
पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स में पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज व सिम्स बिलासपुर में ही गरीब सवर्णों के लिए 10-10 फीसदी सीटें आरक्षित है। जबकि राजनांदगांव, रायगढ़, जगदलपुर व अंबिकापुर में इसकी सीटें ही नहीं है। एडमिशन के लिए दो चरणों की काउंसिलिंग हो चुकी है। अब खाली सीटों को भरने के लिए मापअप राउंड किया जाएगा।
इसकी तारीख की घोषणा इसी हफ्ते होने की संभावना है। अभी ज्यादातर मेडिकल कॉलेजों में नॉन क्लीनिकल विभागों की सीटें खाली है। कुछ कॉलेजों में क्लीनिकल विभागों की सीटें भी खाली है। क्लीनिकल सीटें तो भर जाएंगी, लेकिन नॉन क्लीनिकल खाली रहने का ट्रेंड रहा है। ये सीटें एडमिशन की तारीख निकलने के बाद लैप्स हो जाती हैं।
कहां कितनी सीटें
ईडब्ल्यूएस की सीटें केंद्र सरकार आवंटित करती है। महासमुंद कॉलेज को 25 सीटें मिल गई हैं। जहां भी सीटें हैं, वहां सवर्णों को 10% आरक्षण दिया जा रहा है।





