
आदेश भी फर्जी ,जिला पंचायत अध्यक्ष के दस्तखत भी फर्जी,लेकिन जिला पंचायत अध्यक्ष ने नही कराई कोई FIR , जानिए क्या है पूरा मामला…

रायपुर : ऐसा लगने लगा है कि फर्जी और भ्रष्ट काम करने वाले लोगो के लिए छत्तीसगढ़ किसी जन्नत से कम नही है। कोयला में कमीशनखोरी के आरोपो के घेरे में सरकार के कई अफसर ED और IT के रडार पर है। रायपुर नगर निगम में भी तेलीबांधा सौदर्यीकरण के नाम पर निगम अधिकारियों का जांबाज कारनामा सामने आया जिसमे तेलीबांधा से VIP रोड तक की सड़क डिवाइडर का लगभग 2 करोड़ की लागत से होने वाला निर्माण और सन्दर्यीकरण के काम का टेंडर जारी होने से पहले ही अलॉट हो गया और जब काम पूरा होने को है तो नगर निगम उसी काम के लिए टेंडर निकाल रहा है। और अब नारायणपुर के अलावा जगदलपुर कोंडागांव जिले में जिला पंचायत अध्यक्ष के फर्जी आदेश से ठेकेदारों ने करोड़ो की सोलर लाइटें आदिवासी ग्रामीण इलाकों में लगा दी है। इस पूरे फर्जीवाड़े के पीछे किसी पारख नाम के शख्स का शातिर दिमाग बताया जा रहा है। सोलर लाइट लगाने वाले ठेकेदारों के मुताबिक पारख खुद को विधायक प्रतिनिधि बताता है और इसी पारख नाम के व्यक्ति के माध्यम से उन्हें ग्रामीण इलाको में सोलर लाइट लगाने के शासकीय आदेश प्राप्त हुए और सभी ने चंद दिनों में ही ये ग्रामीण इलाकों को सोलर लाइटस की रोशनी से जगमगा दिया। लेकिन जब बिल के भुगतान के लिए संबंधित जिला जनपद सीईओ कार्यालय पहुँचे तो पता चला कि ग्रामीण इलाकों में सोलर लाइट लगाने के ऐसे कोई आदेश ही जारी नही हुए हैं।
सोलर लाइट लगाने वाले ठेकेदार अब ऐसे बिलों के भुगतान के लिए जनपद कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं जिनका कोई कार्यादेश ही जारी नही हुआ । काम करने वाले ठेकेदारो का आरोप है कि फर्जी आदेश दिखाकर उनसे 1 करोड़ रुपये तक का कमीशन भी पारख नाम के इस शख्स ने लिया। जानकारी के मुताबिक नारायणपुर ,जगदलपुर और कोंडागांव जिले के कई गांव में 7 ठेकेदारों ने मिलकर लगभग 20 से 25 करोड़ की सोलर लाइट्स लगा दी। सोलर लाइट लगाने संबंधी ऐसा ही एक आदेश नारायणपुर जिला पंचायत कार्यालय का chhattisgarh.co के हाथ भी लगा जिसके मुताबिक नारायणपुर जिले के 25 ग्राम पंचायतों में सोलर स्ट्रीट लाइट्स इंस्टॉलेशन की अनुमति संबंधी आदेश जारी किया गया ।

इस आदेश पत्र के नीचे जिला पंचायत अध्यक्ष श्यामबती रजनु नेताम के दस्तखत भी है लेकिन जब इस संबंध में उनका पक्ष जानने उनसे बात की तो उन्होंने इस आदेश पत्र को ही फर्जी बात दिया । उनके मुताबिक न ये आदेश उनके कार्यालय से जारी हुआ है और न ही इसमें नीचे किये गए दस्तखत उनके है। लेकिन इन सब के बीच पूरा सिस्टम ही सवालो के घेरे में है।
जिला पंचायत कार्यालय ने अब तक ऐसे फर्जी आदेशो के खिलाफ पुलिस में कोई शिकायत क्यो दर्ज नही कराई है।
ठेकेदारों ने बिना किसी कार्यादेश और किसी शासकीय अधिकारी की मंजूरी के कैसे करोड़ो की सोलर लाइट्स लगा दी है।
सोलर लाइट्स लगाने वाले ठेकेदारों ने भी क्यो अब तक इस मामले में कोई शिकायत नही की है।





