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बाल आश्रम में गैंगरेप के बाद नाबालिग बनी मां:बाल आयोग ने जांच के बाद दिया कार्रवाई का भरोसा, पूर्व मंत्री बोलीं-अफसरों ने दबाया मामला

हरेन्द्र बघेल : रायपुर के SOS माना बाल आश्रम में 14 साल की बच्ची से गैंगरेप हुआ। बच्ची प्रेग्नेंट हो गई। 1 साल तक ये मामला अफसरों ने दबाए रखा। अब इस मामले में राज्य बाल आयोग संज्ञान लेगा। इस प्रकरण को लेकर बाल आयोग की अध्यक्ष तेजकुंवर नेताम ने दैनिक भास्कर से कहा- हम इस प्रकरण की जानकारी लेकर दोषियों पर कार्रवाई करेंगे।

बाल आयोग अध्यक्ष तेजकुंवर नेताम ने कहा- ये मामला गंभीर है। हम इस इस पूरी घटना की जानकारी लेंगे और कार्रवाई करेंगे । SP और कलेक्टर से इस केस पर बात करेंगे। तथ्य मंगवाए जाएंगे, और नियमानुसार एक्शन लेंगे। बाल आयोग बच्चों के लिए ही है, बच्ची के साथ न्याय हो यही हमारा प्रयास होगा। बच्चों के लिए ही हम जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, इस प्रकरण को देखा जा रहा है।

ये है पूरा मामला
रायपुर के माना में SOS नाम की इंटरनेशनल एजेंसी बाल आश्रम चलाती है। जिला प्रशासन इसमें सहयोग करता है। जून 2021 में यहां रह रही एक बच्ची के साथ रेप हुआ नवंबर 2021 में जब वो प्रेग्नेंट हुई तो FIR करवाई गई। आश्रम के ही एक कर्मचारी अंजनी शुक्ला को इस मामले में आरोपी बताकर गिरफ्तार किया गया। बच्ची ने जिस बच्चे को जन्म दिया उसका DNA आरोपी से मैच नहीं किया इस लिए अंदेशा है बच्ची के साथ शारीरिक संबंध किसी और ने भी बनाया और आश्रम जहां बच्ची को सुरक्षित रहना था वहां उसके साथ गैंगरेप होता रहा।

पूर्व मंत्री ने अफसरों पर लगाए आरोप
बाल आश्रम में नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में पूर्व महिला बाल विकास मंत्री रमशीला साहू ने कहा- यह बेहद ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि राजधानी में बालिका सुधार गृह में इस तरह घटना निकलकर सामने आती है। उससे भी अधिक दुर्भाग्य जनक है महिला एवं बाल विकास विभाग अधिकारियों द्वारा मामले की लीपापोती करना और उसे दबाया जाना।

साहू ने आगे कहा- राजधानी में इतनी बड़ी वारदात हो जाती है और मंत्री अनिला भेंडिया कहती हैं उनके संज्ञान में नहीं। यह शर्मनाक है। अधिकारी कुछ कहते हैं। पुलिस कुछ और कहती है और जांच रिपोर्ट में कुछ और ही सामने आता है। पीड़िता को अभी तक वही रखा जाता है जहां उसके साथ दुष्कर्म हुआ था और उससे भी दबावपूर्ण बयान दिलवाए जाते हैं। इस घटना ने कांग्रेस राज में बेटियों और महतारियों के प्रति कार्यप्रणाली की पोल खोल दी है।

भाजपा के सवाल

  • पूर्व मंत्री रमशीला साहू ने पूरे घटनाक्रम को लेकर कई गंभीर सवाल पूछे है। जिस महिला एवं बाल विकास विभाग के बाल संरक्षण इकाई ने मामले को दबा कर रखा था उनपर अभी तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई है?
  • एनजीओ पर अभी तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
  • वे कौन लोग हैं जिन्हें बचाने के लिए पूरे मामले की रोज लीपापोती की जा रही है?
  • जिस स्थान पर बालिका के साथ बलात्कार हुआ अभी तक उसे उसी स्थान पर क्यों रखा गया है क्या पीड़िता को दबाव में रखना चाहते हैं?
  • पीड़िता के बच्चे व आरोपी के डीएनए रिपोर्ट मैच नहीं होने के बाद यह साफ है कि मामले में और लोग भी संलिप्त है। इसके बाउजूद भी सामूहिक दुष्कर्म के नजरिए से इसकी जांच क्यों नहीं जा रही क्यों बाकी लोगो को गिरफ्तार नहीं किया जा रहा?

मंत्री तक को पता नहीं मामला
बाल आश्रम और महिला बाल विकास विभाग के अफसरों ने इस पूरी घटना को दबाया। महिला बाल विकास विभाग की मंत्री अनिला भेंडिया को भी इस केस की कानों-कान खबर नहीं लगने दी। अब मीडिया में मामला फूटा तो मंत्री को खबर लगी। इस मामले में मंत्री अनिला भेड़िया ने अपने दिए बयान में कहा है कि उन्हें भी ये केस पता नहीं था। खबरों के जरिए ही पता चला है। इसमें लड़की ने जिसे आरोपी बताया पुलिस ने उसे पकड़ा है। इस केस की फिर से पूरी तरह से जांच कराएंगे, जो भी जिम्मेदार होगा, दोषी होगा उसपर कार्रवाई करेंगे।

बच्ची की देखरेख करने वाले को दिल्ली भेजा
इस पूरे केस में हुई चूक या जानबूझकर बरती गई ढिलाई को इस बात से समझा जा सकता है कि मामले की अहम कड़ी को ही छोड़ दिया गया। जिस बच्ची का रेप हुआ उसकी देखभाल करने वाली हाउस मदर (आया) को कांड के फौरन बाद दिल्ली ट्रांसफर कर दिया गया। मामले में उस महिला का बयान तक नहीं लिया गया, जबकि संभव है वो इस केस के बारे में कुछ न कुछ जानती हो।

अफसरों ने किया घाल-मेल
बच्ची के प्रेग्नेंट होने, उसके रेप की खबर अफसरों ने लीक नहीं होने दी। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक अपनी कुर्सी बचाने के चक्कर में इस केस को दबाया गया। अफसरों ने कुछ बड़े अफसरों को भी पैसे दिए। वरना इतनी बड़ी घटना उजागर हो जाती। आश्रम के किसी अफसर या जिम्मेदारों पर इस मामले में कोई कार्रवाई अब तक नहीं हुई। सभी अफसर अपने पदों पर बने रहे, किसी के खिलाफ काेई जांच तक का आदेश नहीं हुआ। इस मामले में आश्रम की डायरेक्टर निपुना सेन से संपर्क करने का प्रयास किया गया मगर उन्होंने जवाब नहीं दिया।

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