
छत्तीसगढ़ के 25 वर्ष का सफरनामा, नए राज्य में कितना विकसित हुआ उत्तर छत्तीसगढ़

राज्य निर्माण के बाद सरगुजा संभाग का कितना विकास हुआ और कौन सी बड़ी सौगात इस संभाग को मिली इसके बारे में जानते हैं.
सरगुजा: भारत का दिल मध्यप्रदेश क्षेत्रफल की दृष्टि से जितना बड़ा था उतनी ही समृद्ध इस प्रदेश की विरासत थी. मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल है. राजधानी ही किसी प्रदेश के सियासत की धुरी होती है लेकिन सियासत के इस केंद्र से राज्य की सीमा करीब 1 हजार किलोमीटर दूर बस्तर के कोंटा तक फैली हुई थी. कोंटा की आवाज भोपाल तक पहुंच पाना कितना कठिन रहा होगा ये अनुमान आप लगा सकते हैं. दूसरी ओर उत्तर छत्तीगढ़ की भी राजधानी भोपाल से करीब 7 से 8 सौ किलोमीटर की दूरी है. ऐसे में विकास की कल्पना ही अलग थी. लेकिन समय बदला और वर्ष 2000 में मध्यप्रदेश का एक हिस्सा अलग करके छत्तीसगढ़ राज्य बनाया गया.

जब राज्य बना तो बड़ी समृद्धि छत्तीसगढ़ के हिस्से में
आई. छत्तीसगढ़ पावर, वन और खनिज संपदा से भरा प्रदेश बना, लेकिन इस समृद्धि के साथ नक्सलवाद का दंश भी इस नवोदित राज्य को विरासत में मिला था. चुनौतियों से लड़ते हुए राज्य किसी तरह आगे बढ़ा और उत्तर छत्तीसगढ़ सहित पूरे प्रदेश ने विकास के नए आयाम लिखे. हम बात उत्तर छत्तीसगढ़ यानी कि सरगुजा संभाग की कर रहे हैं. राज्य निर्माण के बाद इस संभाग का कितना विकास हुआ और कौन सी वो बड़ी सौगात है जो अब तक अधूरी हैं या नहीं मिल सकी हैं.

1 नवम्बर सन 2000 को राज्य निर्माण के बाद सरगुजा में कई काम हुए. छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी बने, जो एक आईएएस अफसर थे. लिहाजा उनकी सरकार के तीन साल के अल्प काल में भी विकास ने गति पकड़ी. लेकिन इसके बाद हुए छत्तीसगढ़ के पहले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई और भाजपा ने डॉ रमन सिंह को मुख्यमंत्री बनाया. रमन सिंह 15 साल तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे और उन्होंने कई बड़ी सौगातें सरगुजा को दी.
सरगुजा में मेडिकल कॉलेज

सरगुजा में मेडिकल सुविधाओं का विस्तार सबसे अहम था. जिसके लिए सरगुजा में मेडिकल कॉलेज खोला गया. आज मेडिकल कॉलेज के साथ साथ मेडिकल कॉलेज अस्पताल भी मिल चुका है. निर्माण का काम भाजपा सरकार ने शुरू कराया था और इसे पूरा कांग्रेस की सरकार में किया गया. कैंसर की जांच के लिए हाईटेक लैब सरगुजा में स्थापित किए गए. आरटीपीसीआर लैब, विश्व स्तरीय लेबोरेट्री, हमर लैब सरगुजा में खोला गया. कैंसर की निशुल्क कीमोथेरेपी सरगुजा में शुरू की गई. किडनी मरीजों के लिए निशुल्क डायलिसिस की सुविधा शुरू की गई. स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरगुजा में बड़े बदलाव राज्य निर्माण के बाद हुए है. हालांकि अब भी बहुत से काम करने बचे हैं. अभी भी सरगुजा में ट्रामा सेंटर, न्यूरो सर्जन और न्यूरो फिजिशियन की सुविधा नहीं है. बड़ी बात ये है कि मेडिकल कॉलेज में अस्पताल भवन का काम आज भी अधूरा है.निशुल्क कीमोथेरेपी के वर्तमान डॉक्टर के इस्तीफा दे चुके हैं, जिसकी वजह से कीमोथेरेपी बंद पड़ी है. लेकिन बड़े तुलनात्मक बदलाव हुए हैं.

शिक्षा के क्षेत्र में भी सरगुजा काफी आगे बढ़ चुका है.
मेडिकल कॉलेज खुलने से यहां मेडिकल की पढ़ाई शुरू हो सकी है. इसके साथ ही, सरगुजा को कृषि विज्ञान केंद्र, कृषि महाविद्यालय मिला, जहां एग्रीकल्चर के छात्र पढ़ाई कर रहे हैं. अनुसंधान केंद्र में कृषि वैज्ञानिक नए प्रयोग करते हैं और किसानों को उन्नत तकनीकी से अवगत कराते हैं. अब छात्रों को सरगुजा में ही एग्रीकल्चर की पढ़ाई करने का अवसर मिल पा रहा है जबकि इससे पहले जबलपुर और फिर रायपुर के कृषि महाविद्धायल में जाकर छात्र पढ़ाई करते थे.हर जिले में हार्टिकल्चर कॉलेज खोले गये हैं.

सरगुजा में रेल लाइन का विस्तार
सरगुजा में राज्य निर्माण के बाद रेल सुविधाओं में भी इजाफा हुआ. मध्यप्रदेश से जोड़ने वाली रेल लाइन पहले सूरजपुर जिले के विश्रामपुर तक ही थी. उसे बढाकर अंबिकापुर तक किया गया और इस लाइन में एक मात्र ट्रेन शहडोल अंबिकापुर के अतिरिक्त, अम्बिकापुर से जबलपुर, अंबिकापुर-मनेन्द्रगढ़-अनूपपुर, अम्बिकापुर शहडोल मेमू और अम्बिकापुर से दुर्ग तक की ट्रेन शुरू हुई. इसके बाद बीते वर्ष अंबिकापुर से देश की राजधानी दिल्ली तक ट्रेन शुरू कर दी गई. रेल सुविधा बढ़ने से सरगुजा के व्यापार में भी परिवर्तन देखा गया. हालांकि अब भी सरगुजा रेल सुविधाओं में काफी पीछे है. अब भी यहां से, बरवाडीह, रेनुकूट और कोरबा तक रेल लाइन विस्तार की मांग बनी हुई है.

सरगुजा संभाग में परिवहन
राज्य निर्माण के बाद सरगुजा में एयरपोर्ट बनकर तैयार हो चुका है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस एयरपोर्ट का लोकार्पण भी कर दिया. हवाई सेवा भी सरगुजा में शुरू हुई . लेकिन हवाई सेवा नियमित नहीं मिल सकी. जिसके बाद अब सरगुजा की हवाई सेवा बंद जैसी ही है.
इसी क्रम में सड़क मार्ग भी बढ़े हैं
मध्यप्रदेश से अंबिकापुर आने के लिए 4 लेन सड़क नेशनल हाइवे पर बनाई गई. यही सड़क अम्बिकापुर से आगे निकलकर जशपुर, झारखण्ड के गुमला तक पहुंचती है. अंबिकापुर से राजधानी रायपुर जाने के लिए भी बेहतर सड़क बन चुकी है. कटघोरा से रायपुर 4 लेन और अंबिकापुर से कटघोरा 2 लेन सड़क है. कटघोरा अंबिकापुर सड़क को भी 4 लेन किये जाने का सर्वे शुरू हो चुका है. अंबिकापुर से बनारस मार्ग का भी निर्माण हो चुका है, जिसे अब दोबारा फोर लेन बनाने की जरूरत महसूस होने लगी है और एक नया नेशनल हाइवे मिला है, जो अंबिकापुर से बलरामपुर जिला होते हुए झारखण्ड को जोड़ेगा, इस सड़क का टेंडर हो चुका है लेकिन एक वर्ष से अधिक समय बीतने के बाद भी काम शुरू नहीं हो सका है. अंबिकापुर से जशपुर होते हुए रांची जाने की सड़क भी बन चुकी है, लेकिन अम्बिकापुर से रायगढ़ सड़क पत्थलगांव तक ही बन सकी है और लम्बे समय से पत्थलगांव से रायगढ़ तक की सड़क आज तक निर्माणाधीन है.

कोल माइंस के आसपास के क्षेत्र का विकास
जिले में उद्योग के तौर पर कोल माइंस ही हैं, इनमे ज्यादातर माइंस एसईसीएल की हैं और कुछ माइंस राजस्थान राज्य विद्धुत निगम लिमिटेड के पास हैं. माइनिंग के कारण इनके आसपास के गांव अब शहरों में बदल चुके हैं. इन क्षेत्रों में शिक्षा, चिकित्सा की अपनी अलग व्यवस्था है इनमे काम करने वाले कर्मचारियों की कॉलोनी और भीड़ के कारण कई बाजार विकसित हुए और पहले के गांव अब कसबे या शहर बन चुके हैं, स्वरोजगार की स्थति भी बदली हैं.

देश का तीसरा सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व
इस बीच बीते वर्ष एक और बड़ी उपलब्धि सरगुजा को टाइगर रिजर्व के रूप में मिली और कोरिया, सूरजपुर और बलरामपुर जिले में फैले अभयारण्यों को मिलाकर एक टाइगर रिजर्व बनाया गया है. इस टाइगर रिजर्व के बनने से क्षेत्र का पर्यटन और पर्यटन से स्थानीय रोजगार व व्यापार भी बढेगा. देश का तीसरा सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व गुरु घासीदास तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व अब सरगुजा में है.लम्बे समय से चली आ रही इस मांग को छतीसगढ़ की कैबिनेट ने मंजूरी दी. उत्तर छत्तीसगढ़ के लिए ये बहुत बड़ी उपलब्धि है. सरगुजा घनघोर वन क्षेत्र के लिए जाना जाता रहा है, यहां वाइल्ड लाइफ का बेहतर सामंजस्य है. इस नई शुरुआत से टाइगर्स के साथ सरगुजा में रोजगार के भी अच्छे दिन आ सकेंगे, सरकार इस टाईइगर रिजर्व को पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित करेगी जिससे यहां स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिलेगा.





