
हरेंद्र बघेल रायपुर। Jheeram Shraddhanjali Diwas: झीरम घाटी की घटना को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब हर साल 25 मई को झीरम श्रद्धांजलि दिवस मनाया जाएगा। इस दिन शहीद हुए जनप्रतिनिधियों, सुरक्षाबलों के जवानांे को दो मिनट का मौन रख श्रद्धांजलि दी जाएगी। इस संबंध में राज्य सरकार ने सभी विभागों के विभागाध्यक्ष, कलेक्टर और आयुक्त को पत्र लिखा है।
पत्र में कहा गया है कि, झीरम श्रद्धांजलि दिवस के अवसर पर 25 मई प्रदेश के सभी शासकीय-अर्धशासकीय कार्यालय में झीरम घाटी में शहीद हुए जनप्रतिनिधियों, सुरक्षाबलों के जवानों तथा नक्सल हिंसा में वर्तमान तथा विगत वर्षों में शहीद हुए सभी लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। राज्य शासन द्वारा प्रतिवर्ष 25 मई को झीरम श्रद्धांजलि दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया है।
प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी झीरम घाटी श्रद्धांजलि दिवस के दिन शहीदों की स्मृति में सभी शासकीय एवं अर्द्धशासकीय कार्यालयों में दो मिनट का मौन रखा जाएगा। श्रद्धांजलि कार्यक्रम में अधिकारियों-कर्मचारियों को राज्य को पुनः शांति का टापू बनाने के लिए शपथ भी दिलाई जाएगी। झीरम घाटी श्रद्धांजलि दिवस मनाए जाने के संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग छत्तीसगढ़ शासन द्वारा प्रदेश के समस्त विभाग, राजस्व मंडल के अध्यक्ष, समस्त विभागाध्यक्ष, संभागायुक्त और कलेक्टरों को पत्र प्रेषित किया है।

नक्सलियों ने की थी अंधाधुंध फायरिंग
25 मई 2013 को कांग्रेस पार्टी की परिवर्तन यात्रा का कार्यक्रम सुकमा जिले में आयोजित किया गया था। कार्यक्रम के बाद सभी को जगदलपुर लौटना था। इस दौरान सुकमा जिले के सीमा क्षेत्र तोंगपाल में भी परिवर्तन यात्रा के स्वागत की तैयारी की गई थी। इस कार्यक्रम में शामिल सभी नेता सड़क मार्ग से जगदलपुर लौट रहे थे। वहीँ पूर्व मुख्यमंत्री अजित जोगी हेलीकॉप्टर से सीधे रायपुर रवाना हो गए थे। शाम लगभग चार बजे कांग्रेस का काफिला तोंगपाल से होते हुए दरभा की ओर रवाना हुआ ही था।
तभी अचानक विस्फोट की आवाज सुनाई दी। काफिले पर दोनों से ओर से गोलियां चली। की आवाज गूंजने लगी। घाटी के दोनों ओर ऊंची पहाड़ियों में चढ़कर सैकड़ों नक्सली अंधाधुंध गोलियां बरसा रहे थे। लगातार हो रही फायरिंग में कई कांग्रेस के कई जनप्रतिनिधि और सुरक्षाबल के जवान समेत 30 से अधिक की मौत हुई थी।





