
छत्तीसगढ़ में फिर पत्रकार पर जानलेवा हमला – गिधौरी में गुंडों के हौसले बुलंद

गिधोरी : छत्तीसगढ़ में एक बार फिर लोकतंत्र के चौथे स्तंभ – पत्रकारिता – पर हमला हुआ है। बलौदाबाज़ार जिले के गिधौरी थाना क्षेत्र में एक निजी चैनल के पत्रकार पर खुलेआम जानलेवा हमला किया गया। आरोपी पर पहले भी इसी पत्रकार पर हमला करने के गंभीर आरोप हैं, लेकिन अदालत से आसानी से बेल मिल जाने के बाद उसके हौसले इतने बुलंद हो गए कि उसने दिनदहाड़े दोबारा वारदात को अंजाम दे डाला।

आपको बता दे कि गिधौरी थाना क्षेत्र की तस्वीरें हैं… जहां बीती रात पत्रकार दिनेश मानिकपुरी अपनी बाइक पर बैठे थे। तभी पीछे से आकर आरोपी नरेंद्र साहू ने उनका गला दबाया और सड़क पर गिरा दिया। इसके बाद बेरहमी से लात-घूंसों से पिटाई की गई। ये पूरी वारदात सामने की दुकान में लगे CCTV कैमरे में कैद हो गई। जहां पीड़ित पत्रकार का आरोप है कि कुछ महीने पहले उन्होंने गांव में अवैध कच्ची शराब बिक्री की शिकायत की थी। इसी रंजिश में पहले भी उन पर जानलेवा हमला किया गया था। गिधौरी पुलिस ने आरोपियों को जेल भी भेजा था, लेकिन कोर्ट से आसानी से बेल मिलने के बाद आरोपी फिर से खुलेआम वारदात पर उतर आया। जहां पार्थी दिनेश मानिकपुरी (पत्रकार) ने बताया कि इससे पहले भी मुझ पर जानलेवा हमला हुआ था… पुलिस ने कार्रवाई की थी… लेकिन कोर्ट से बेल मिलते ही इन लोगों के हौसले इतने बढ़ गए कि दूसरी बार भी गला दबाकर जान से मारने की कोशिश की गई।

तो दूसरी तरफ आरोपी नरेंद्र साहू पर गांव में अवैध महुआ शराब बेचने के आरोप हैं। ग्रामीणों और दिनेश मानिकपुरी ने इस मामले की शिकायत समाधान शिविर में की थी। इसके बाद से ही आरोपी रंजिश पाल रहा था। इससे पहले भी नरेंद्र साहू और उसके साथियों ने दिनेश मानिकपुरी के घर के पास हमला किया था, जिसमें उनके सिर पर गंभीर चोट आई थी। बीच-बचाव करने आए उनके पिता को भी पीटा गया था।

पत्रकारों पर बढ़ते हमलों ने छत्तीसगढ़ में मीडिया की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। पुलिस कार्रवाई के बावजूद अदालत से आसानी से बेल मिलने के कारण अपराधियों के हौसले बुलंद हैं, और वे खुलेआम कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं। सवाल ये है कि क्या इस तरह की घटनाओं से पत्रकारिता पर दबाव बनाने की कोशिश नहीं हो रही?








