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राष्टीय बालिका दिवस पर सलौनी कला में विधिक साक्षरता शिविर का हुआ आयोजन

राष्टीय बालिका दिवस पर सलौनी कला में विधिक साक्षरता शिविर का हुआ आयोजन

भटगांव : 24 जनवरी को प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक शाला – सलौनीकला में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रायगढ़ के निर्देशानुसार एवं तालुका विधिक सेवा समिति भटगांव के अध्यक्ष न्यायाधीश महोदय श्री पुनीतराम गुरुपंच जी के नेतृत्व में कार्यदिवस दिनांक 24/1/2026/को प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक शाला सलौनीकला मे राष्ट्रीय बालिका दिवस के खास अवसर पर माननीय न्यायधीश महोदय जी द्वारा शिविर आयोजित कर राष्टीय बालिका दिवस के सम्बन्ध में जागरूकता एवं जानकारी प्रदान की गई जिसमे बताया गया कि 24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका दिवस इसलिए मनाया जाता है क्योंकि इस दिन भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी (1966 में), और इसे बेटियों के सम्मान, उनके अधिकारों, शिक्षा, स्वास्थ्य और लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष दिन के रूप में समर्पित किया गया है, जिसे महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 2008 में शुरू किया था, ताकि लड़कियों के सशक्तिकरण पर जोर दिया जा सके।

मुख्य कारण:

इंदिरा गांधी का सम्मान: 24 जनवरी, 1966 को इंदिरा गांधी देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं, जो नारी शक्ति और नेतृत्व का प्रतीक हैं, इसलिए यह दिन बेटियों के लिए खास है।

कानूनी प्रावधान:हिन्दू कोड बिल (Hindu Code Bill) स्वतंत्रता के बाद 1950 के दशक में डॉ. बी. आर. अंबेडकर द्वारा हिंदू पर्सनल लॉ को संहिताबद्ध और आधुनिक बनाने के लिए पेश किया गया एक क्रांतिकारी कानून था। 1955-56 में पारित चार प्रमुख अधिनियमों के माध्यम से, इसने हिंदू महिलाओं को संपत्ति में अधिकार, तलाक का अधिकार, बहुविवाह पर रोक और गोद लेने का समान अधिकार प्रदान किया।

हिन्दू कोड बिल के मुख्य पहलू:

उद्देश्य: हिंदू समाज में लैंगिक समानता, सामाजिक न्याय और विवाह, तलाक व विरासत से संबंधित नियमों में सुधार करना।

इतिहास: 11 अप्रैल 1947 को अंबेडकर द्वारा पेश किया गया, लेकिन कट्टरपंथी रूढ़िवादी समूहों के कड़े विरोध के कारण 1951 में यह पास नहीं हो सका, जिसके बाद अंबेडकर ने इस्तीफा दे दिया। भारत में डॉ भीमराव अम्बेडकर ने हिन्दू कोड विधि के बदौलत यह कानून महिलाओं की आत्मनिर्भरता और उन्हें पुरुषों के बराबर कानूनी दर्जा देने में एक मील का पत्थर माना जाता है।

जागरूकता: यह दिन बालिकाओं के अधिकारों, शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाता है, और समाज में व्याप्त लिंग भेदभाव को खत्म करने का प्रयास करता है।

सशक्तिकरण: इसका उद्देश्य लड़कियों को सशक्त बनाना और उन्हें लैंगिक भेदभाव के बिना आगे बढ़ने के लिए समान अवसर और वातावरण प्रदान करना है।

सरकारी पहल: यह दिवस ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसे अभियानों के अनुरूप है, जो बालिकाओं के समग्र विकास पर केंद्रित हैं।

संक्षेप में, यह दिन बालिकाओं के सामने आने वाली चुनौतियों (जैसे बाल विवाह, कन्या भ्रूण हत्या) पर ध्यान आकर्षित करता है और उन्हें सशक्त बनाने के लिए प्रेरित करता है, जिससे वे समाज का एक मजबूत हिस्सा बन सके | इसका उद्देश्य लड़कियों को समान अवसर देना है हर लड़की को समान शिक्षा का अधिकार है लड़कियां समाज कि शक्ति है हमे लड़िकयों को सम्मान करना चाहिए  बालिकाओं हर क्षेत्र मे आगे बढ़ रही है शिक्षित बालिका देश का भविष्य करती है बाल विवाह एवं बच्चों पर मोबाइल का दुष्प्रभाव का जानकारी दिया गया। इसके अतिरिक्त अन्य चेतना एवं जागरूकता तथा बच्चों को बढ़ाई/शिक्षा के सम्बन्ध में विशेष जानकारी प्रदान की गई |

नालसा योजना कि जानकारी दी  चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 महिला हेल्पलाइन 181 साइबर हेल्पलाइन 1930 नालसा हेल्पलाइन नंबर 15100 कुल लाभान्वितों की संख्या 80 जिसमे पैरा लिगल वालिंटियर (PLV) नरेश कुमार विश्वकर्मा थाना भटगांव एवं PLV कामदेव अनंत थाना सरसीवा सहयोगी के रूप में उपस्थित होकर अपनी सेवा प्रदान की गई | आरक्षक खिलावन बघेल पुलिस थाना भटगांव , शशिचंद्रा, रमेश पटेल, राजीव साहू , खगेश्वरी चंद्रा प्रधान पाठक मिडिल स्कूल सलौनिकला मोंगरा देवांगन प्र. पाठक प्राइमरी स्कूल सलौनी कला के कर्मचारीगण उपस्थित रहे।

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