

बिलासपुर: बिलासपुर उच्च न्यायालय से कांग्रेस नेता ( Congress leader Anil Tah) को अब एक बड़ी राहत मिली है। बता दें कि पीआईएल के बाद से ही कांग्रेस नेता अनिल टाह विवादों में घिरे हुए थे। जिसके बाद अब उनके खिलाफ लगी जनहित याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 226 (Article 226 of the Constitution) के अंर्तगत जनहित याचिका के रूप में सुनवाई योग्य न होने पर खारिज कर दिया।
क्या था मामला?
बता दें कि कांग्रेस नेता अनिल टाह पर शासकीय भूमि में अवैध कब्जा कर बाउंड्री वॉल का बनाने का आरोप लगाते हुए पीआईएल याने कि जनहित याचिका लगाई गई थी। दरअसल अकबर हुसैन और राजकुमार उर्फ प्रेम आडिले ने ये पीआईएल फाइल की थी।

वही अब कोर्ट ने इस याचिका को जनहित में नहीं, बल्कि व्यक्तिगत स्वार्थ निहित पाया। जिसके बाद भारतीय संविधान के अनुच्छेद 226 के अंर्तगत जनहित याचिका के रूप में सुनवाई योग्य न होने पर खारिज कर दिया।
क्या कहता है संविधान का अनुच्छेद 226
अनुच्छेद 226 उच्च न्यायालयों को नागरिकों के मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन अथवा ‘किसी अन्य उद्देश्य’ के लिये सभी प्रकार की रिट जारी करने का अधिकार प्रदान करता है।
यहाँ ‘किसी अन्य उद्देश्य’ का अर्थ किसी सामान्य कानूनी अधिकार के प्रवर्तन से है।
इस प्रकार रिट को लेकर उच्च न्यायालय का अधिकार क्षेत्र सर्वोच्च न्यायालय की तुलना में काफी व्यापक है।
जहाँ एक ओर सर्वोच्च न्यायालय केवल मौलिक अधिकारों के हनन की स्थिति में ही रिट जारी कर सकता है, वहीं उच्च न्यायालय को किसी अन्य उद्देश्य के लिये भी रिट जारी करने का अधिकार है।





