छत्तीसगढ़

बच्चा बेचने का मामला:नर्स का मिला क्लू, गिरफ्तार करने आधी रात रवाना हुई पुलिस की टीम

निसंतान दंपत्ति को 4 लाख रुपए में बच्चा बेचने के लिए फोन पर सौदेबाजी करने वाली चंगोराभाठा की नर्स का क्लू मिल गया है। नर्स अपने मकान में ताला लगाकर रिश्तेदार के यहां छिपी हुई है। नर्स का क्लू मिलने के बाद पुलिस की टीम आधी रात रवाना हो गई। पुलिस ने आधा दर्जन जगहों पर छापेमारी की। पुलिस का दावा है कि जल्द ही नर्स को हिरासत में लिया जाएगा।

उससे पूछताछ की जाएगी। नर्स के मोबाइल की साइबर सेल में जांच की जाएगी। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि बच्चा खरीद-फरोख्त में लिप्त नर्स चंगोराभाठा में रहती है। दैनिक भास्कर के स्टिंग ऑपरेशन में फंसने के बाद घर में ताला लगाकर परिवार के साथ गायब हो गई है। उसने अपना फोन भी बंद कर दिया है।

प्रारंभिक जांच में जानकारी मिली कि वह अपने रिश्तेदार के यहां छिपी हुई है। इसके बाद कुछ रिश्तेदारों के यहां छापे भी मारे गए, लेकिन वह नहीं मिली। पुलिस कार्रवाई की भनक लगते ही वह दूसरे रिश्तेदार के यहां चली गई। वह अपने रिश्तेदार का मोबाइल उपयोग कर रही है।

अंबेडकर अस्पताल से भी लिंक तलाश रही पुलिस

प्रदेश के सबसे बड़े अंबेडकर अस्पताल में भी बच्चे की खरीद-फरोख्त करने वाली नर्स के लिंक की तलाश हो रही है। पुलिस विभाग ने अस्पताल चौकी को लिंक पता करने कहा है। पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है कि नर्स का लिंक कहीं अंबेडकर के नर्सों से तो नहीं है। हालांकि पहले यह स्पष्ट हो चुका है कि बच्चा चोर नर्स किसी प्राइवेट अस्पताल से जुड़ी है।

राजधानी के सेरोगेसी व आईवीएफ सेंटर भी पुलिस के निशाने पर हैं। दरअसल, बच्चा नहीं होने पर लोग ऐसे दोनों सेंटरों पर जाते हैं। पुलिस ऐसे सेंटरों को पत्र लिखकर जरूरी जानकारी मांगेगी। अंबेडकर अस्पताल में रोजाना 25 से 30 महिलाओं की डिलीवरी होती है।

इसमें ऐसी भी लड़कियां होती हैं, जो बिन ब्याही मां बन जाती हैं। ऐसी लड़कियों को बड़ी मशक्कत के बाद बच्चा सौंपा जाता है।  दो साल में 8 से ज्यादा ऐसे केस आए हैं, जब लड़की गर्भपात के लिए अस्पताल पहुंची, लेकिन मजबूरी में डिलीवरी करानी पड़ी।

ऐसी लड़कियों को काफी समझाइश दी जाती है कि बच्चे किसी को सुपुर्द नहीं करना है और न ही बेचना है। हालांकि पुलिस केवल अस्पताल तक निगरानी करते हैं। बाद में बच्चे का क्या होता है, इसकी जानकारी नहीं रखते।

प्रदेश में हर साल 20 सरोगेसी
प्रदेश में 10 आईवीएफ व सरोगेसी सेंटर हैं, जिसमें 8 सेंटर है। सालभर में 20 से सरोगेसी के केस होते हैं। इसमें विदेशी महिलाएं भी शामिल हैं। एक सरोगेसी केस में 7 लाख रुपए के आसपास खर्च होता है। कम खर्च होने के कारण ही विदेशी यहां सरोगेसी कराने आते हैं।

अंदरूनी जांच की जा रही
चिकित्सा शिक्षा विभाग ने अस्पताल प्रबंधन को अंदरुनी जांच के निर्देश दिए हैं। प्रबंधन ने जांच शुरू कर दी है। ऐसे डॉक्टर, नर्स, आया व दूसरे स्टाफ का पता लगाया जा रहा है, जो बच्चों के इलाज व प्रबंधन पर ज्यादा ध्यान देता है। प्रबंधन का कहना है कि अभी कुछ नहीं कहा जा सकता।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!