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*टसर कृमिपालन से मिली पलायनमुक्ति और आत्मनिर्भर बने ध्रुवकुमार*

सफलता की कहानी

*टसर कृमिपालन से मिली पलायनमुक्ति और आत्मनिर्भर बने ध्रुवकुमार*

*कोसा कृमिपालन से पक्का घर, नई मोटरसायकल और बच्चों को अच्छी शिक्षा दे रहे हैं ध्रुवकुमार*

*कम लागत अच्छी कमाई, कोसाफल से ध्रुवकुमार को मिली समृद्धि* 

      सारंगढ़-बिलाईगढ़, 19 फरवरी 2026/जिले के बरमकेला विकासखंड के ग्राम सण्डा (तोरना) रेशम विभाग की योजना से जुड़े हितग्राही ध्रुव कुमार की कहानी प्रेरणादायक के साथ ही संघर्ष उद्यमशीलता और आत्मविश्वास की मिसाल है। पहले जब गांव में कोई काम नहीं था तो काम की तलाश में घर से दूर जाकर मजदूरी करते थे। सीमित आय और अनिश्चित मजदूरी से परिवार चलाना उनके लिए बहुत कठिन था परन्तु उन्होंने परिस्थितियों के सामने घुटने टेकने के बजाए अतिरिक्त आय का साधन ढूँढना शुरू किया और वे रेशम प्रभाग की टसर कृमिपालन योजना से जुड़े। टसर कृमिपालन उपरांत टसर कोसाफल के विक्रय से अच्छी आमदनी होने से घर समृद्ध तो हुआ ही स्थानीय स्तर पर ही रोजगार प्राप्त होने की वजह से उनके परिवार का कोई भी सदस्य मजदूरी या अन्य कार्य हेतु विस्थापित नहीं हुआ।

विगत 03 वर्षों से ध्रुव कुमार टसर कृमिपालन कार्य द्वारा वर्ष 2022-23 में 119340 रूपये, वर्ष 2023-24 में 127731 रूपये, वर्ष 2024-25 में 321058 रूपये एवं वर्ष 2025-26में अब तक 173320 रूपये आय अर्जित कर चुके हैं, जिसका उपयोग उन्होंने अपने कच्चे घर को पक्का करने में एवं दैनिक उपयोग के लिए 01 नया मोटर सायकल खरीदा है। स्थानीय स्तर पर कोसा कृमिपालन कार्य से होने वाले आय को वे अपने कृषि कार्य में लगाकर अतिरिक्त आमदनी प्राप्त कर रहे हैं, जिससे आज उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई एवं बच्चों को भी अच्छी शिक्षा दे पा रहे हैं।

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