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CG NEWS – शिक्षकों की भर्ती घोटाले की जांच ईओडब्ल्यू-एसीबी करेगी! शिक्षा मंत्री ने जांच के दिये थे निर्देश, अब सरकार ने जांच के लिए …

छत्तीसगढ़ के कई स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ी की शिकायतों पर सरकार ने सख्ती दिखाई है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश के बाद इस मामले की जांच ईओडब्ल्यू-एसीबी को सौंपी जा रही है। प्रारंभिक जांच में गड़बड़ी की पुष्टि हुई है और इसमें स्कूल शिक्षा विभाग के कुछ अफसर भी लपेटे में आ सकते हैं।

CG NEWS – शिक्षकों की भर्ती घोटाले की जांच ईओडब्ल्यू-एसीबी करेगी! शिक्षा मंत्री ने जांच के दिये थे निर्देश, अब सरकार ने जांच के लिए …

रायपुर :  छत्तीसगढ़ सरकार ने शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच ईओडब्ल्यू-एसीबी (आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो) को सौंपने का फैसला लिया है। सूत्रों के अनुसार एक-दो दिन में इसका औपचारिक आदेश जारी कर दिया जाएगा। यह कदम इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि प्रारंभिक स्तर पर हुई पड़ताल में गड़बड़ी की पुष्टि हो चुकी है। दरअसल प्रदेश कईजिलों में व्यावसायिक शिक्षकों की भर्ती हुई थी।

बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय खुद इस मुद्दे पर गंभीर हैं और उन्होंने शिकायतों पर कड़ी कार्रवाई के संकेत दिए हैं। वहीं, स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने हाल ही में विभागीय समीक्षा बैठक के दौरान इस मामले को पुलिस जांच के दायरे में लाने की बात कही थी। अब उस दिशा में औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो गई है।

कैसे हुई भर्ती और कहां हुई गड़बड़ी?

प्रदेश में हाल ही में पीएम श्री स्कूलों के लिए व्यावसायिक शिक्षकों की भर्ती की गई थी। लगभग 1500 पदों पर भर्ती का जिम्मा आउटसोर्सिंग के माध्यम से छह कंपनियों को दिया गया था। इनमें भोपाल की आइसेक्ट, लरनेट और चार अन्य कंपनियां शामिल थीं।

आरोप है कि इन कंपनियों ने बेहद जल्दबाजी में—सिर्फ एक हफ्ते के भीतर—विज्ञापन जारी करने से लेकर पूरी भर्ती प्रक्रिया पूरी कर ली। यही नहीं, कंपनियों ने अपने स्तर पर शैक्षणिक योग्यता के मानकों में संशोधन कर दिया और कई अपात्र अभ्यर्थियों का चयन कर लिया।

नियुक्ति की प्रकृति

व्यावसायिक शिक्षकों की नियुक्ति 11 महीने के लिए अनुबंध आधार पर की जाती है। ये शिक्षक स्कूलों में कंप्यूटर, एग्रीकल्चर और अन्य व्यावसायिक विषयों की ट्रेनिंग देते हैं। इस भर्ती से जुड़ा पूरा खर्च केंद्र सरकार द्वारा वहन किया जाता है।

विभागीय मिलीभगत के आरोप

सूत्रों का कहना है कि इस गड़बड़ी में केवल कंपनियां ही नहीं, बल्कि विभाग के कुछ अफसर भी शामिल हो सकते हैं। शुरुआती चर्चा है कि डिप्टी डायरेक्टर स्तर तक के कुछ अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है। माना जा रहा है कि कंपनियों और विभागीय अफसरों की मिलीभगत से ही अपात्र उम्मीदवारों को मौका मिला।अब जबकि जांच ईओडब्ल्यू-एसीबी के पास जा रही है, तो साफ है कि आने वाले दिनों में बड़े खुलासे हो सकते हैं। सरकार का कहना है कि दोषी चाहे कोई भी हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा। यह भी संकेत मिले हैं कि अगर जांच में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की पुष्टि होती है तो संबंधित कंपनियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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