
संतान की प्राप्ति व लंबी आयु के लिए माताओं ने रखा कमरछठ व्रत




माताएं निर्जला रहकर शिव-पार्वती की पूजा कर सगरी (मिट्टी का कुआं) बनाकर सारी रस्में निभाई




पूजा के पश्चात अपने बच्चों को छुई पोती मारकर दिया आशीर्वाद
के. पी. पटेल की खास रिपोर्ट…
भटगांव (छत्तीसगढ़): यूपी बिहार में जिस तरह संतान की लंबी आयु के लिए महिलाओं द्वारा सूर्य आराधना का महापर्व छठ पूजा की जाती है उसी प्रकार छत्तीसगढ़ में भी संतानों की लंबी आयु के लिए माताओं द्वारा कमरछठ का व्रत रखा गया. जगह-जगह व्रतियों के समूह ने पूजा अनुष्ठान कर अपना व्रत पूरा किया.

कमरछठ छत्तीसगढ़ के प्रमुख त्योहारों में से एक है. इसे हलछठ या हलषष्ठी भी कहा जाता है. बिहार में होने वाले छठ की तर्ज पर इस व्रत को करने वाली माताएं निर्जला रहकर शिव-पार्वती की पूजा करती हैं साथ ही सगरी (मिट्टी का कुआं) बनाकर सारी रस्में निभाई जाती है. इसके बाद कमरछठ की कहानी सुनकर शाम को डूबते सूर्य को अर्ध्य देने के बाद अपना व्रत खोलती हैं.

छत्तीसगढ़ में संतान की लंबी उम्र के लिए माताएं कमरछठ व्रत रखती हैं. कमर छठ के दिन छह तरह की भाजियां, पसहर चावल (जहां हल ना चला हो), काशी के फूल, महुआ के पत्ते, धान की लाई, भैंस का दूध, दही सहित कई छोटी-बड़ी पूजन सामग्री भगवान शिव को अर्पित कर संतान के दीर्घायु जीवन की कामना करती हैं.

वहीँ महिलाओं ने पूजा के पश्चात अपने बच्चों को छुई पोती मारकर आशीर्वाद दिया.
वहीँ एक घर मे कुछ महिलाये कमरछट हल षष्ठी की पूजा के बारे मे बताते हुए एक महिला श्रीमती जयश्री साहू ने कहा कि मैं 15 वर्षो से यह व्रत रखती हूँ और इस मकान मे लगभग 12 वर्षो से सभी सहेलियों के साथ सामूहिक पूजा अर्चना करते आ रहे हैं.
वहीँ श्रीमती रेखा देवांगन ने व्रत के बारे मे बताते हुए कहा कि यह व्रत संतान की प्राप्ति एवं बच्चों के दीर्घायु जीवन के लिए रखते है. माता देवकी ने कृष्ण भगवान को बच्चे के रूप मे पाने के लिए यह व्रत रखा था.

श्रीमती लक्ष्मी साहू, सुप्रिया यादव, बिमला यादव,मंजू साहू, केशु साहू, प्रमोदिनी पटेल, जयश्री साहू, रेखा देवांगन, दीक्षा पटेल, केशु साहू, राधा साहू इत्यादि महिलाओं ने सामूहिक पूजा अर्चना कर अपने बच्चों के दीर्घायु जीवन के लिए यह व्रत रखा था.






