

भिलाई स्टील प्लांट प्रबंधन ने कोरोना काल में मेडिकल सेवाओं के लिए ठेकेदार के अंडर में कोरोना योद्धाओं को नौकरी पर रखा था। अब यही कोरोना योद्धा नौकरी के लिए सड़क पर बैठने को मजबूर हैं। इनका आरोप है कि ठेकेदार उनसे एक दिन की ड्यूटी के पीछे 100 रुपए कमीशन लेता था। नहीं देने पर उसने उन्हें काम से निकाल दिया है। इन कोरोना योद्धाओं ने बीएसपी प्रबंधन से भी गुहार लगाई है, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं कर रहा है। इसके विरोध में सभी 28 संविदा कर्मी अपने परिवार के साथ पिछले 20 दिनों से धरने पर बैठे हैं।
धरने पर बैठी कोरोना योद्धा मनीषा नेताम का कहना है कि भिलाई प्रशिक्षु कल्याण समिति के अंडर में उन्हें साल 2020 में कोरोना वारियर के रूप में सेवा पर रखा गया था। उन्होंने कोरोना काल में सेक्टर 9 हॉस्पिटल में अपनी सेवाएं दी। कोरोना पॉजिटिव होने के बाद जब ठीक हुई तो फिर काम पर लौटे और बिना अपनी जान की परवाह किए सेवा देते रहे। अब जब कोरोना काल खत्म हो गया है तो उन्हें काम से निकाला जा रहा है। उन्हें बिना किसी पूर्व नोटिस के 1 अक्टूबर 2022 से काम पर नहीं लिया गया।
बीएसपी ठेकेदार भीमा यादव और मार्कंडेय तिवारी अपनी सुपरवाइजर के माध्य से हर एक ड्यूटी के पीछे 100 रुपए की अवैध वसूली करते थे। इसका उनके पास पूरा सबूत भी है। उन्होंने सुपरवाइजर ज्योति राज को बाकायदा ऑनलाइन ट्रांजेक्शन से पेमेंट किया है। इतना ही नहीं उनके पास वाइस रिकार्डिंग भी है, जिसमें ज्योति उनसे पैसे मांग रही है। जब इस बारे में भास्कर ने ज्योति राज से बात की तो उसने कुछ भी बोलने से मना कर दिया। वहीं ठेकेदार भीमा यादव का कहना है कि कर्मचारियों ने उनसे एडवांश लिया था, उसकी का पैसा वह लोग मांग रहे थे। वहीं मार्कंडेय तिवारी ने सभी आरोपों को गलत बताया है। बीएसपी प्रबंधन ने इस मामले की जांच कर कार्रवाई की बात कही है।

हर दिन मिलता था 447 रुपए वेतन, उसमें भी 100 की वसूली
कोरोना योद्धा सतीश देवतलेश ने बताया कि उन्हें हर एक ड्यूटी के पीछे 447 रुपए वेतन मिलता था। बीएसपी से भुगतान होने के बाद ठेकेदार ड्यूटी वाइज पेमेंट खाते में पूरा करता था। उसके बाद सुपरवाइजर ज्योति राज उनसे नगद और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के रूप में हर एक ड्यूटी के पीछे 100 रुपए के हिसाब से वसूली करती थी। इस बात की शिकायत बीएसपी से करने के बाद भी अधिकारियों ने कुछ नहीं किया। वहीं ठेकेदार भीमा यादव और मार्कंडेय तिवारी वहां आकर बोलते थे कि कमीशन नहीं दोगे तो नौकरी से निकाल देंगे। उन्हें यह कमीशन बीएसपी के अधिकारियों को देना पड़ता है, इसलिए वह भी इसे ले रहे हैं। शिकायत करने से कुछ होने वाला नहीं है।
20 दिनों से लगातार कर रहे धरना प्रदर्शन
नौकरी से निकाले जाने के बाद सभी कर्माचीरी सेक्टर 9 हॉस्पिटल के इंचार्ज डॉ. शाहिद खाने से मिले। उन्होंने कहा कि ठेकेदार से व्यवहार अच्छा नहीं रखोगे तो वो नौकरी पर कैसे रखेगा। कर्मचारियों का आरोप है कि ऐसा करके शाहिद खान ठेकेदार को 100 रुपए हर दिन का देने के लिए दबाव बना रहे थे। जब शाहिद खान ने कहा कि वह उन्हें नौकरी पर नहीं रख सकते हैं तो पूरे 28 कर्मचारी एक होकर 3 दिनों तक जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा अस्पताल के बाहर धरने पर बैठे। इसके बाद 22 अक्टूबर से सेक्टर वन मुर्गा चौक में लगातार धरने पर बैठे हुए हैं।





