गुजरात ब्रिज हादसे के बाद एक्शन:9 गिरफ्तार; अटल ब्रिज के लिए भी अलर्ट जारी, 1 घंटे में 3000 लोग ही जा सकेंगे


गुजरात के मोरबी पुल हादसे में पुलिस ने आरोपियों पर कार्रवाई शुरू कर दी है। सोमवार को पुल का रखरखाव करने वाली ओरेवा कंपनी के 2 मैनेजर, ब्रिज की रिपेयरिंग करने वाले दो कॉन्ट्रैक्टर, दो टिकट क्लर्क और तीन सिक्योरिटी गार्ड्स को गिरफ्तार किया गया है। इस हादसे के बाद अहमदाबाद के अटल ब्रिज के लिए भी अलर्ट जारी किया गया है। यहां 1 घंटे में 3000 लोग ही जा सकेंगे। यह अलर्ट अहमदाबाद नगर निगम ने जारी किया है।
राजकोट रेंज के आईजी अशोक कुमार ने शाम को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि 50 लोगों की टीम पुल हादसे की जांच में जुटी है। पत्रकारों ने उनसे सवाल किया कि इसके लिए जिम्मेदार बड़े लोगों को कब गिरफ्तार किया जाएगा। इस सवाल पर आईजी ने कहा- अभी तक जिनकी भूमिका सामने आई, उन्हें गिरफ्तार किया गया। जैसे-जैसे नाम सामने आते जाएंगे और गिरफ्तारियां होती जाएंगी।
PM मोदी ने बुलाई हाईलेवल मीटिंग
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हादसे को लेकर सोमवार को गांधीनगर में हाईलेवल मीटिंग बुलाई। प्रधानमंत्री ने कहा कि पीड़ितों को हर संभव मदद दी जाए। बैठक में मुख्यमंत्री भूपेंद्र भाई पटेल, राज्य के गृह मंत्री हर्ष सांघवी और चीफ सेक्रेटरी, डीजीपी समेत तमाम सीनियर ऑफिसर्स मौजूद रहे।
अब तक 134 की मौत
गुजरात के मोरबी पुल हादसे में मृतकों की संख्या सोमवार सुबह 134 पहुंच गई। इनमें 45 की उम्र 18 साल से कम है। मृतकों में महिलाओं और बुजुर्गों की संख्या ज्यादा है। 170 लोग रेस्क्यू किए गए हैं। हादसा रविवार शाम 6.30 बजे तब हुआ, जब 765 फीट लंबा और महज 4.5 फीट चौड़ा केबल सस्पेंशन ब्रिज टूट गया। 143 साल पुराना पुल ब्रिटिश शासन काल में बनाया गया था।
यह पुल पिछले 6 महीने से बंद था। कुछ दिन पहले ही इसकी मरम्मत की गई थी। हादसे से 5 दिन पहले 25 अक्टूबर को यह ब्रिज आम लोगों के लिए खोला गया। रविवार को यहां भीड़ क्षमता से ज्यादा हो गई। हादसे की भी यही वजह बताई जा रही है। हादसे का 30 सेकेंड का वीडियो भी सामने आया है। इसमें 15 सेकेंड के बाद पुल टूट गया और लोग मच्छू नदी में समा गए।

मोरबी हादसे के बड़े अपडेट्स…
- पुलिस ने मामले में ओरेवा कंपनी का मैनेजर, दो टिकट क्लर्क, रिपेयरिंग करने वाले कॉन्ट्रैक्टर समेत 9 लोग गिरफ्तार किया।
- 50 लोगों की टीम मामले की जांच में जुटी है।
- मामले में धारा 304, 308 और 114 के तहत केस दर्ज किया गया है।
- 26 अक्टूबर को बिना फिटनेस सर्टिफिकेट के खोला गया था सस्पेंशन पुल।
- फोरेंसिक सूत्र के अनुसार, ब्रिज का पुराना केबल भारी दबाव के कारण टूटा।
- PM मोदी मंगलवार दोपहर बाद मोरबी जाएंगे।
- मोरबी हादसे में मारे गए लोगों का पोस्टमॉर्टम नहीं किया जाएगा। ये फैसला गुजरात सरकार ने लिया है।
- राजकोट के भाजपा सांसद मोहनभाई कुंडारिया के परिवार के 12 लोग हादसे में मारे गए।
- हेल्पलाइन नंबर 02822243300) जारी। मोरबी और राजकोट हॉस्पिटल में इमरजेंसी वार्ड बना।
राष्ट्रीय एकता दिवस पर बोलते-बोलते PM मोदी का गला रूंधा
PM मोदी केवड़िया में राष्ट्रीय एकता दिवस पर बोल रहे थे। इस दौरान वे भावुक हो गए। कहा- जिन लोगों को अपना जीवन गंवाना पड़ा, उनके परिवारों को प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं। बचाव कार्य में NDRF, सेना और वायुसेना की टीमें लगी हुई हैं। लोगों को दिक्कतें कम हों, ये कोशिश है। PM मोदी सोमवार दोपहर को बनासकांठा पहुंचे, यहां उन्होंने कई परियोजनाओं की आधारशिला रखी। इस दौरान ब्रिज हादसे पर बात करते हुए वे भावुक हो गए।
बनने के बाद से पुल का कई बार रेनोवेशन किया जा चुका है। हाल ही में दिवाली से पहले इसके मरम्मत का काम 2 करोड़ की लागत से किया गया था। भास्कर को मोरबी के भाजपा सांसद मोहन कुंडारिया ने बताया कि ब्रिज टूटने से जहां लोग गिरे, वहां 15 फीट तक पानी था। कुछ लोग तैरकर बाहर निकल आए, लेकिन कई लोग झूले पर अटके रहे।
सड़क एवं भवन विभाग मंत्री जगदीश पांचाल ने भास्कर से कहा कि यह पुल नगर निगम के दायरे में आता है। निगम के अधिकारियों ने बताया कि ब्रिज की क्षमता 100 लोगों की है, लेकिन रविवार की छुट्टी होने के चलते हादसे के वक्त ब्रिज पर 400 से 500 लोग जमा थे। इसी के चलते ब्रिज बीच से टूट गया
किसी का सुहाग उजड़ा तो किसी की कोख
मोरबी हादसे में किसी ने औलाद खो दी, किसी ने जीवन साथी। किसी की कोख में ही उसकी औलाद की कब्र बन गई। किसी के अपने उसकी आंखों के आगे डूब गए। सोमवार की सुबह से हर ओर ऐसे ही मंजर दिखाई दे रहे हैं।
143 साल से भी ज्यादा पुराना है ब्रिज, मोरबी के राजा यहीं से दरबार जाते थे
मोरबी का यह सस्पेंशन ब्रिज 143 साल पुराना है और इसकी लंबाई करीब 765 फीट है। यह सस्पेंशन ब्रिज गुजरात के मोरबी ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए ऐतिहासिक धरोहर है। इस ब्रिज का उद्घाटन 20 फरवरी 1879 को मुंबई के गवर्नर रिचर्ड टेम्पल ने किया था। यह उस समय लगभग 3.5 लाख की लागत से बनकर तैयार हुआ था। पुल बनाने का पूरा सामान इंग्लैंड से ही मंगाया गया था।
ब्रिज का निर्माण मोरबी के राजा प्रजावत्स्ल सर वाघजी ठाकोर की रियासत के दौरान हुआ था। उस समय राजा राजमहल से राज दरबार तक जाने के लिए इसी पुल का इस्तेमाल करते थे। राजशाही खत्म होने के बाद इस पुल की जिम्मेदारी मोरबी नगर पालिका को सौंप दी गई थी। लकड़ी और तारों से बना यह पुल 233 मीटर लंबा और 4.6 फीट चौड़ा है।





