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जिला सहकारी केंद्रीय बैंक में आर्थिक गड़बड़ी:पूर्व पदाधिकारियों से होगी अब 40 करोड़ रुपए की वसूली

जिला सहकारी केंद्रीय बैंक में आठ साल पहले 40 करोड़ के घोटाले के मामले में पूर्व अध्यक्ष देवेंद्र पांडेय सहित 10 पदाधिकारियों के खिलाफ रिकवरी का निर्णय लिया गया है। सहकारी संस्था पंजीयक के आदेश के बाद बैंक प्रबंधन की ओर से सभी तत्कालीन संचालक मंडल को नोटिस जारी किया गया है। फिलहाल मामले में किसी ने पैसा जमा नहीं किया है, लेकिन जांच और ऑडिट रिपोर्ट में जिस तरह की बातें लिखी हैं, उससे यह साफ है कि तब गबन करने की नीयत से सारा खेल रचा गया।

लोक आयोग ने इसी प्रकरण में एक भ्रष्टाचार की जांच के लिए एक चिट्ठी आगे बढ़ाई है। उन्होंने कलेक्टर ने पूछा है कि तोरवा में जिस जमीन को देवेंद्र पांडेय का बताया जा रहा है, उसमें उनके पिता का नाम क्यों नहीं लिखा गया है? लोक आयोग को जवाब फिलहाल किसी ने नहीं दिया है।

सहकारी केंद्रीय बैंक की शाखा अकलतरा में बिल्डिंग निर्माण के दौरान 1 करोड़ 35 लाख रुपए की आर्थिक अनियमितता उजागर हुई है। सीपत की शाखा में साल 2011 से 2014 के बीच बनी बिल्डिंग में एक करोड़ 80 लाख की अनियमितता सामने आई है। सहकारी संस्था के उप पंजीयक ने जांच रिपोर्ट में पाया कि यहां पदस्थ चार मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिनमें राजेंद्र शर्मा, अमित शुक्ला, शशि भूषण सिंह का मूल पद शाखा प्रबंधक का था।

इन्हें गलत तरीके से सीईओ बनाकर बैंक को आर्थिक क्षति पहुंचाई गई। जांच रिपोर्ट में इस पर विशेष टिप्पणी की गई है। इसके अलावा भी अन्य कर्मचारियों का नाम है। मामले में कुर्की की प्रक्रिया बढ़ाई जा रही है, जिसे लेकर ही देवेंद्र पांडेय सहित अन्य पदाधिकारियों की जमीन और अन्य संपत्तियों की तलाश जारी है।

बिना काम लाखों रुपए निकाल लिए
जशपुरनगर|जिले के बगीचा बीईओ कार्यालय में भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। यहां के बगीचा बीईओ ने अपने मातहतों की मदद से बिना काम किए लाखों रुपए की शासकीय राशि निकाल ली। मामले का खुलासा तब हुआ, जब इसकी शिकायत शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों से हुई। मामले की जांच के बाद ज्वाइंट डायरेक्टर एजुकेशन ने जांच रिपोर्ट को आगे की कार्यवाही के लिए समग्र शिक्षा कार्यालय के पास भेज दी है।

जशपुर जिले में शिक्षा गुणवत्ता को सुधारने के लिए शासन ने कुछ नए संकुल केन्द्र बनाने का निर्णय लिया, जिसमें बगीचा ब्लॉक में शासन के आदेश के बाद 25 नए संकुल बनाए थे, जिसके स्टेब्लिशमेंट खर्च के लिए शासन ने बीईओ और संकुल कार्डिनेटर के संयुक्त खाते में 40-40 हजार रुपए की राशि भेजी थी, लेकिन बीईओ, बीआरसी और एकाउंटेंट ने संकुल के कार्डिनेटर पर दबाव बनाकर ये राशि निकलवा ली और बिना स्टेब्लिशमेंट किए 21 संकुलों की 8 लाख 40 हजार रुपए में हेरफेर कर दिया। इसके बाद मामले में अपने आप को फंसता देख कुछ संकुल काने ऑर्डिनेटर ने इसकी शिकायत संयुक्त संचालक शिक्षा से की थी।

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