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आजादी के 78 वर्षों बाद भी 20 से अधिक गांव अंधेरे में, आक्रोशित ग्रामीणों ने नेशनल हाईवे पर 14 घंटे किया चक्काजाम, लिखित आश्वासन के बाद देर रात समाप्त हुआ आंदोलन

गरियाबंद। जिले के मैनपुर ब्लॉक के आदिवासी बहुल राजापड़ाव क्षेत्र में बिजली की मांग को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश आखिरकार 14 घंटे बाद शांत हुआ। नेशनल हाइवे-130सी पर सोमवार सुबह 8 बजे से शुरू हुआ चक्काजाम देर रात करीब 11 बजे तब समाप्त हुआ, जब प्रशासन ने लिखित आश्वासन देकर वंचित गांवों में विद्युतीकरण का भरोसा दिलाया।

प्रशासन की ओर से दिए गए लिखित आश्वासन में कहा गया है कि राजापड़ाव क्षेत्र की 5 पंचायतों के 20 से अधिक विद्युतविहीन गांवों में बिजली पहुंचाने के लिए आगामी बजट में हर संभव प्रावधान किया जाएगा। साथ ही, जो मजरे-टोले अब तक योजना से छूट गए हैं, उनका शीघ्र सर्वे कर प्राक्कलन तैयार कर शासन को भेजा जाएगा। लिखित आश्वासन मिलने के बाद ही ग्रामीणों ने आंदोलन समाप्त करने पर सहमति जताई।

दरअसल, मैनपुर के राजापड़ाव इलाके की 5 पंचायतों के कई गांव आजादी के 78 वर्षों बाद भी अंधेरे में जीवन यापन करने को मजबूर हैं। बार-बार प्रदर्शन, ज्ञापन और मौखिक आश्वासनों के बावजूद जब स्थिति जस की तस बनी रही, तो इस बार ग्रामीण लिखित आश्वासन पर अड़ गए। इसी मांग को लेकर हजारों महिला-पुरुषों ने नेशनल हाइवे पर बैठकर चक्काजाम कर दिया, जिससे सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।

दिनभर चले आंदोलन के दौरान दोपहर करीब 2 बजे प्रशासन की ओर से अपर कलेक्टर के साथ ग्रामीणों की बातचीत हुई, लेकिन यह चर्चा बेनतीजा रही। इसके बाद भीड़ हटने के बजाय और अधिक दृढ़ हो गई। ग्रामीणों की जिद और बढ़ते दबाव को देखते हुए प्रशासन को दोबारा सकारात्मक पहल करनी पड़ी और देर रात लिखित आश्वासन जारी किया गया।

ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि विद्युत सुविधा केवल एक बुनियादी सुविधा नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और आजीविका से सीधे जुड़ा विषय है। बिजली के अभाव में बच्चों की पढ़ाई, महिलाओं की सुरक्षा और किसानों की कृषि गतिविधियां गंभीर रूप से प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि तय समयसीमा में आश्वासन के अनुरूप कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

फिलहाल प्रशासन के लिखित भरोसे के बाद राजापड़ाव क्षेत्र में स्थिति सामान्य हो गई है और यातायात बहाल कर दिया गया है, लेकिन वर्षों से लंबित विद्युतीकरण की मांग पर अब सबकी नजरें शासन के आगामी बजट और उस पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।

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