24 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ के तृतीय दिवस मे विभिन्न संस्कार निःशुल्क संपन्न, सायंकालीन दीप महायज्ञ का आयोजन, 3100 दिपो से सजा पंडाल

24 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ के तृतीय दिवस मे विभिन्न संस्कार संपन्न
सायंकालीन दीप महायज्ञ का आयोजन, 3100 दीपक प्रज्वलित
दिपो से सुसज्जित स्वास्तिक, ॐ एवं मशाल का भव्य दृश्य
पवनी के लिए 24 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ बना ऐतिहासिक कार्यक्रम

भटगांव/बिलाईगढ़ – नगर पंचायत पवनी अखिल भारतीय गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार के मार्गदर्शन एवं वेदमूर्ति पंडित आचार्य श्रीराम शर्मा एवं माता भगवती देवी शर्मा के सूक्ष्म संरक्षण में स्कूल मैदान पवनी मे हजारों श्रद्धालुओं कि उपस्थिति मे तीन पाली मे यज्ञ सम्प्पन कराया गया।

आज यज्ञ के तीसरे दिन विभिन्न संस्कार जिसमें सीमांत पुंसवन( गर्भवस्था मे होनेवाले संस्कार) नामकरण ,विद्यारम्भ, मुंडन आदि संस्कार किया गया। शांतिकुंज से आये युग ऋषियों ने विभिन्न संस्कारों के बारे मे विस्तृत रूप से श्रद्धालुओं को समझाया । यज्ञ कि महिमा बताई एवं यज्ञ कार्य सम्पन्न कराया।अपने वक्तव्य मे उन्होंने गर्भाधान से लेकर मृत्यु पर्यन्त सोलह संस्कारो को क्यों करना चाहिये इसे समझाया और बताया कि श्रद्धा, आत्मसंयम और पुरुषार्थ का समन्वय ही हमें जीवन के उच्चतर लक्ष्यों की ओर ले जाता है।श्रद्धा हमें विश्वास और धैर्य देती है।


संयम हमें सही दिशा में केंद्रित रहने की शक्ति प्रदान करता है और पुरुषार्थ हमारे प्रयासों को सफलीभूत बनाता है । इन गुणों को अपनाकर, जीवन के हर क्षेत्र में सफलता और शांति प्राप्त की जा सकती है।

“श्रद्धा और आत्मविश्वास को सहेजना” वास्तव में जीवन की चुनौतियों का सामना करने और उन्हें अवसर में बदलने का मंत्र है।

श्रद्धा जीवन में सकारात्मकता और आध्यात्मिकता का आधार है। यह न केवल हमें आत्मबल प्रदान करती है, बल्कि हमारे विचारों और कर्मों को भी पवित्र और उच्च बनाती है।श्रद्धा एक ऐसा गुण है जो हमें हर चुनौती का सामना धैर्य और समर्पण के साथ करने की शक्ति देता है। यह हमारे भीतर विश्वास, आस्था और दिव्यता को जागृत करता है, जिससे हम अपने जीवन को एक उच्च उद्देश्य की ओर प्रेरित कर सकते हैं।इसे सहेजने का अर्थ है, अपने मन और आत्मा को नकारात्मकता से दूर रखते हुए, सत्कर्मों और सकारात्मक सोच के साथ जीवन जीना। श्रद्धा हमें यह सिखाती है कि सच्चे प्रयास और विश्वास से ही जीवन का वास्तविक उद्देश्य प्राप्त किया जा सकता है। सायंकालीन दीप महायज्ञ मे 3100 दीपक प्रज्वलित किया गया जहाँ दीप से कई मनमोहक कला का प्रदर्शन किया गया जहाँ दिपो से स्वास्तिक, ॐ एवं मशाल का आकर्षक सजावट किया गया था जो आकर्षक का केंद्र बना. नगर के महिलाओ एवं बहनो ने अपने थाल मे दीपक सजाकर पंडाल पहुचे जहाँ दीप महायज्ञ के साथ दीपोत्सव पर्व मनाया. पूरा नगर दिपो से जगमगाता हुआ दिखाई दिया जैसे दीपावली पर्व मनाया जा रहा हो. यह दीपोत्सव पर्व नगर के लिए बहुत ही आकर्षक रहा.




वहीँ आज तृतीय दिवस 24 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ मे सैकड़ो हजारों की संख्या मे नगर एवं ब्लॉक व जिले के श्रद्धालुगण यज्ञ हवन किये और लगभग 50 बच्चो, माताओ एवं भाइयों का संस्कार निःशुल्क सम्पन हुआ. कार्यक्रम मे नगर पंचायत पवनी सहित सारंगढ़ बिलाईगढ़, जांजगीर चाम्पा, बलौदाबाजार भाटापारा एवं महासमुंद जिले के कोने कोने से गायत्री परिजन एवं श्रद्धालूगण हजारों की संख्या मे शामिल हुए.





