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भटगांव नगर मे हल षष्ठी को महिलाएं संतान के दीर्घायु एवं संतान प्राप्ति के लिये की विधिवत पूजा अर्चना

भटगांव नगर मे हल षष्ठी को महिलाएं संतान के दीर्घायु एवं संतान प्राप्ति के लिये की विधिवत पूजा अर्चना

भटगांव के विभिन्न मंदिरो मे की हलषष्ठी की सामूहिक पूजन

भटगांव – भाद्रपद मास प्रारंभ होते ही सनातन धर्म में व्रत एवं त्योहारों का सिलसिला शुरू हो जाता है. इन्हीं पर्वों में से हर छठ भी एक है. यह पर्व जन्माष्टमी से दो दिन पहले मनाया जाता है. यानी सप्तमी युक्त हलषष्टी का योग बनता है तब हर छठ पर्व मनाया जाता है. इसको हल छठ, ललही छठ बलदेव छठ, रंधन छठ, चंदन छठ, तिनछठी, तिन्नी छठ आदि नामों से भी जाना जाता है.

वहीं नगर पंचायत भटगांव की पुत्रवती महिलाओं एवं गर्भवती महिलाओं ने कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि 24 अगस्त को दोपहर में 12 बजकर 43 मिनट से सामूहिक रूप से 2-3 घंटो की विधि विधान से पूजा अर्चना अपने बच्चों की दीर्घायु जीवन एवं संतान प्राप्ति के लिये ब्राह्मण पंडित एवं गायत्री परिवार के परिब्राज़क की उपस्थिति मे किया गया.

यह व्रत आमतौर पर पुत्रवती स्त्रियां ही करती हैं. इस दिन वे पूरे विधि-विधान से पूजा पाठ करती हैं. हल षष्ठी की पर महिलाएं पुत्र की संख्या के हिसाब से 6 मिट्टी के बर्तनों में 6,7 भुने हुए अनाज या मेवा रखती हैं. हल षष्ठी पर महिलाएं गड्ढा बनाती हैं और उसे गोबर से लिपाई कर तालाब का रूप देती हैं. इसके बाद झरबेरी और पलाश की एक-एक शाखा बांधी जाती है और हर छठ को गाड़ा जाता है. पूजा के समय भुना हुआ चना, जौ की बालियां भी चढ़ाई जाती हैं. कहा जाता है कि व्रत के दौरान हल जोत कर उगाए अन्न का सेवन नहीं किया जाता. इस तरह पूजा पाठ कर रात्रि में चांद देख कर व्रत खोला जाता है. हालांकि, इस त्योहार को कई जगह भिन्न तरह भी मनाया जा सकता है.

इस तरह भटगांव के अधिकांश मंदिरो मे महिलाओ द्वारा हलषष्ठी का व्रत धूमधाम से मनाया गया.

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