छत्तीसगढ़

8 दिसंबर तक किरंदुल नहीं आएगी यात्री ट्रेनें:सुरक्षागत कारणों की वजह से लिया गया निर्णय, इस साल 75 दिन थमे पहिए

छत्तीसगढ़ में किरंदुल से विशाखापट्टनम तक चलने वाली किरंदुल-विशाखापट्टनम नाइट एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनें अब 8 दिसंबर तक किरंदुल नहीं जाएगी। ये दोनों ट्रेनें पिछले 2 दिनों से दंतेवाड़ा स्टेशन में ही रोकी जा रही हैं। फिर यहीं से विशाखापट्टनम के लिए लौट रही हैं। बताया जा रहा है कि, नक्सल दहशत की वजह से सुरक्षागत कारणों को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने यह निर्णय लिया है। ऐसे में एक बार फिर से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं इस साल करीब 75 दिन दोनों यात्री ट्रेनों के पहिए थमे रहे।

दरअसल, ईको रेलवे की तरफ से जारी किए गए आदेश में 8 दिसंबर तक ट्रेनों का अंतिम स्टॉपेज दंतेवाड़ा ही निर्धारित किया गया है। हालांकि, इस दौरान किरंदुल से लौह अयस्क लेकर विशाखापट्टनम तक मालगाड़ियों की आवाजाही बरकार रहेगी। ईको रेलवे विशाखापट्टनम मंडल मुख्यालय के सीनियर डिवीजनल कॉमर्शियल मैनेजर एके त्रिपाठी के मुताबिक, नक्सली अपना PLGA (पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी) सप्ताह मना रहे हैं। सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए ट्रेनों को रोके जाने का निर्णय लिया गया है। ऐसे में अब बचेली, किरंदुल के यात्रियों को दंतेवाड़ा स्टेशन से ट्रेन पकड़नी होगी।

पहाड़ियों से घिरा है रेलवे ट्रैक, वारदात की होती है आशंका

दरअसल, किरंदुल-विशाखापट्टनम रेलवे मार्ग घने जंगल और पहाड़ियों से घिरा हुआ है। दंतेवाड़ा से आगे बासनपुर और झिरका का इलाका नक्सलियों का कोर इलाका माना जाता है। नक्सली आए दिन इसी जगह अधिकांश वारदात को अंजाम देते हैं। इसलिए रेलवे किरंदुल तक पैसेंजर ट्रेनों की आवजाही पर ब्रेक लगा देता है। हालांकि, कुछ महीने पहले तक जगदलपुर में ही यात्री ट्रेनें रोक ली जाती थी। लेकिन, लोगों की मांग के बाद दंतेवाड़ा अंतिम स्टॉपेज किया गया है। दरअसल, इस रूट पर केवल 2 ही यात्री ट्रेन चलती है।

इस साल इतने दिन नहीं हुआ परिचालन

  • जनवरी महीने में 7 दिन और फरवरी में सिर्फ एक दिन ट्रेन नहीं चली है।
  • नक्सली बंद की वजह से 10 मार्च से 15 मार्च के बीच ट्रेनों का परिचालन बंद रहा। वहीं इसी महीने 23 मार्च से 29 मार्च तक नक्सलियों के साम्राज्यवाद विरोधी सप्ताह के तहत किरंदुल तक ट्रेनें नहीं पहुंची।
  • 25 अप्रैल को माओवादियों ने दंडकारण्य बंद का आह्वान किया था। जिसके चलते 23 अप्रैल से 26 अप्रैल तक यात्री ट्रेनें नहीं चली।
  • 28 अप्रैल से 6 मई के बीच ब्रिज के मेंटेंसन कार्य को लेकर ट्रेनों का परिचालन रोक दिया गया। यह तारीख बढ़ कर 12 मई हो गई थी।
  • जून माह में अग्निपथ विरोध के चलते 19 और 20 जून को ट्रेन बंद रही।
  • 26 जून से 2 जुलाई तक माओवादियों के आर्थिक नाकेबंदी सप्ताह को देखते ट्रेनों के पहिए थमे थे।
  • 28 जुलाई से 3 अगस्त तक नक्सलियों के शहीदी सप्ताह को देखते हुए ट्रेन के पहिए थम गए थे।
  • 15 और 16 अगस्त को भी ट्रेन का परिचालन रोक दिया गया था।
  • नक्सलियों के भाईचारा दिवस को देखते 7 सितंबर से 10 सितंबर तक यात्री ट्रेनें किरंदुल नहीं गई। बाद में यह तारीख बढ़कर 20 सितंबर हो गई थी।
  • नक्सलियों के कश्मीर डे के चलते 25 से 27 अक्टूबर तक ट्रेनों के पहिए थमे रहे। यात्री ट्रेनें दंतेवाड़ा से आगे किरंदुल नहीं आई।

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