बलौदा बाज़ारलोकप्रिय

आज 5 जुन 47 वां विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष,… तालाब, मंदिर के पास लगाए पीपल , बरगद, नीम ,आम के पौधे तालाब से पानी लाकर सींचते हैं पौधों को, पर्यावरण को बचाने रावन के अश्वनी वर्मा कर रहे हैं अनुकरणीय पहल 

आज 5 जुन 47 वां विश्व पर्यावरण दिवस विशेष

तालाब, मंदिर के पास लगाए पीपल , बरगद, नीम ,आम के पौधे तालाब से पानी लाकर सींचते हैं पौधों को

पर्यावरण को बचाने रावन के अश्वनी वर्मा कर रहे हैं अनुकरणीय पहल

बलौदा बाजार-सिमगा विकास खंड रावन गौरा चौक निवासी अश्वनी वर्मा जीवन को बचाने के लिए अनुकरणीय कर रहे हैं।पर्यावरण की सुरक्षा के लिए अश्वनी वर्मा ने रामादामा तालाब व शिव मंदिर के आस-पास बरगद, पीपल,आम,तथा नीम पौधे लगाए हैं। इन पौधों की सुरक्षा स्वयं करते हैं गर्मी के दिनों में तालाब से बाल्टी में पानी लेकर पौधों को सींचते हैं। उनके लगाए कई पौधे बड़े हो गए हैं वह पिछले 10 वर्षों से इस कार्य में जुटे हुए हैं वर्मा ने बताया कि ऐसा करने से मुझे खुशी महसूस होती है। आज जल, जंगल, जमीन, हवा ,जीव-जंतु संकट में है ।प्राकृतिक से छेड़छाड़ ही प्रदूषण का मुख्य कारण है‌। पर्यावरण को बचाने के लिए हर संभव प्रयास करते हुए अपने व वातावरण में सकारात्मक बदलाव लाते हुए फिर से अपने जीवन में पशु, पक्षी, वृक्ष, वनप्रेम विकसित करना होगा।

वनों की कटाई ओजोन परत में कमी ग्लोबल वार्मिग व विषाक्तअपशिष्ट प्लास्टिक प्रदूषण के मुख्य कारण है। प्लास्टिक का उपयोग न करकें ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाकर पर्यावरण को प्रदूषण मुक्त बनाया जा सकता है। इसके लिए आप सबकी सहभागिता अनिवार्य है ।तभी हमारा पर्यावरण दिवस सफल होगा। श्री वर्मा , इनके लगन व मेहनत ने वातावरण की शुद्धता पर अनुकरणीय कार्य किया है। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि आज इंसान भागदौड़ के इस जमाने में 5 मिनट भी समय दूसरों के लिए नहीं निकाल पाते हैं।

दस साल से कर रहे हैं सेवा

ऐसे समय में पिछले 10 साल से पौधों की सेवा कर रहे हैं। यहां इनके पेड़-पौधे व पर्यावरण के प्रति प्रेम को दर्शाता है ।उल्लेखनीय है कि लोग पौधा तो लगा लेते हैं लेकिन उनकी देखरेख व नियमित पानी नहीं दे पाते जिसके कारण पौधे पेड़ बनने से पहले ही ठुंठ में बदल जाते हैं लेकिन इन्होंने ज्यादा तर पीपल,बरगद का पौधा लगाया बल्कि देखरेख में भी और स्वयं सुरक्षा घेरा किया।

वही उनके पुत्र बालक देवेन्द्र कुमार वर्मा आठ वर्षीय आदित्य बिरला पब्लिक स्कूल ग्रासिम अल्ट्राटेक ने 2017 में आम के पेड़ रोपित किया था। अब पौधा बड़ा व सुरक्षित हैं।

 पानी पेड़ शुद्ध हवा जीवन की अनमोल दवा-दीपक

विश्व के कल-कारखानों के धुएँ से न केवल विश्व का पर्यावरण प्रदूषित होता जा रहा है, बल्कि इसका सबसे घातक असर ओजोन की मोटी चादर (कवच) पर पड़ रहा है। योग शिक्षक दीपक कुमार वर्मा ने इस अवसर पर बताया ओजोन की मोटी पट्टी सूर्य की परा-बैंगनी किरणों से धरती के जीवन की सुरक्षा करती है। यदि ओजोन की चादर न हो या पतली पड़ जाये तो धरती का समूचा जीवन संकट में पड़ सकता है। वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चलता है कि उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों के आकाश में स्थित ओजोन की मोटी चादर में छिद्र हो गये हैं। विश्व के वायुमण्डल और पर्यावरण में जिस तेज गति से कार्बन-डाई-आक्साइड की मात्रा बढ़ती जा रही है वह समूची मानव जाति के लिए खतरे की घंटी है। धरती पर मंडराते सबसे बड़े संकट का नाम है ‘‘ग्रीन हाउस प्रभाव’’ इसके पीछे कार्बन-डाई-आक्साइड गैस का ही हाथ है। आंकड़ों के सांख्यिकी विश्लेषण बताते हैं कि वायुमण्डल में कार्बन-डाई-आक्साइड की मात्रा लगातार बढ़ती जा रही है। कार्बन-डाई-आक्साइड बढ़ने का मुख्य कारण पेड़ पौधे की कमी , (जंगलों की कटाई )कारखाने और मोटर वाहन हैं।

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