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विश्व तम्बाकू निषेध दिवस पर बाँकी मोंगरा कॉलेज में कार्यशाला एवं शपथ..

विश्व तम्बाकू निषेध दिवस पर बाँकी मोंगरा कॉलेज में कार्यशाला एवं शपथ..

बाँकी मोंगरा : पूरी दुनिया में तंबाकू का इस्तेमाल सबसे गंभीर जन स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। इसकी वजह से श्वसन से जुड़े कई सारे गंभीर खतरे और क्रॉनिक रोग होते हैं, जिसमें कैंसर, फेफड़े की बीमारी, कार्डियोवैस्कुलर रोग और स्ट्रोक शामिल हैं। इसकी वजह से हर साल लगभग 13.5 करोड़ मौतें होती हैं। धूम्रपान करना ना केवल सेहत के लिये नुकसानदायक होता है और मौत की ओर ले जाता है, बल्कि लोगों पर आर्थिक बोझ भी डालता है। इसका प्रभाव असामान्य रूप से भारत के कमजोर वर्ग वाली आबादी पर पड़ता है, जिसमें महिलाएं, युवा और कम आय वाले लोग शामिल हैं। जर्नल ऑफ निकोटिन एंड टोबैको रिसर्च के हाल के अध्ययन के अनुसार, भारत में सेकंड हैंड स्मोकिंग, प्रत्यक्ष रूप से 567 बिलियन रुपये वार्षिक दर में योगदान देते हैं। यह तंबाकू के उपयोग से होने वाले चौंका देने वाले सबसे ज्यादा वार्षिक आर्थिक बोझ $27.5 बिलियन के कुल वार्षिक स्वास्थ्य देखभाल के खर्च का 8% है।

छत्तीसगढ़ में तंबाकू की लत से बच्चे भी नहीं बच पा रहे हैं। भले ही सरकार ने गुटखा बेचने पर पाबंदी लगा रखी हो, लेकिन पान मसालों और अन्य माध्यम से इसे धड़ल्ले से बेचा जा रहा है। ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे के अनुसार छत्तीसगढ़ में 39.1 प्रतिशत लोग तंबाकू का सेवन करते हैं। यह देश की औसतन 28.4 प्रतिशत से अधिक है। इसमें 7 प्रतिशत लोग ऐसे थे, जिन्होंने 15 वर्ष की उम्र से पहले ही तंबाकू का सेवन शुरू कर दिया था। 29 प्रतिशत ने 15-17 वर्ष की उम्र से और 35.4 प्रतिशत ने 18-19 वर्ष में सेवन शुरू किया है। औसतन 18.5 वर्ष की आयु में तंबाकू का सेवन शुरू किया था। ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक छत्तीसगढ़ में 14 साल से कम आयु वर्ग में तंबाकू, सिगरेट का सेवन भारत में सर्वाधिक है।

31 मई को विश्व तम्बाकू निषेध दिवस के अवसर पर शासकीय नवीन महाविद्यालय बाँकी मोंगरा में कार्यशाला का आयोजन किया गया। संस्था के प्राचार्य डॉ पुष्पराज लाजरस के संरक्षण एवं मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में सर्वप्रथम वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ शिवदयाल पटेल ने महाविद्यालय स्टॉफ को तम्बाकू का सेवन न करने एवं तम्बाकू मुक्त महाविद्यालय परिसर बनाने का शपथ दिलाया। डॉ पटेल ने अपने उद्बोधन में कहा कि लोगों को जागरूक करने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन द्बारा तंबाकू निषेध दिवस प्रतिवर्ष 31 मई को मनाया जाता है, जिससे कि पूरे विश्व का तंबाकू से फैलाई गई महामारियों की ओर ध्यान आकर्षित कर सके। आगे उन्होंने कहा कि

भारत सरकार द्वारा सभी तंबाकू उत्पादों के लिये सेहत से जुड़ी कुछ खास चेतावनी देने के बावजूद, 15 साल से अधिक उम्र के लगभग 26.7 करोड़ से भी ज्यादा वयस्क तंबाकू का इस्तेमाल कर रहे हैं, क्योंकि ये सस्ते होते हैं। भारत में तंबाकू के इस्तेमाल का सबसे प्रचलित रूप धुंआरहित तंबाकू है- इसमें खैनी, गुटका, तंबाकू और जर्दा के साथ पान का बीड़ा आता है। वहीं इसके बाद, तंबाकू के धुएं वाले रूप जैसे बीड़ी, सिगरेट और हुक्का का इस्‍तेमाल भी खूब किया जाता है।

रविंद्र कुमार पैकरा सहायक प्राध्यापक समाजशास्त्र ने कहा कि स्वस्थ एवं शान्तिमय जीवन के लिए किसी भी व्यक्ति को किसी भी प्रकार की नशे से बचना चाहिए चाहे वो तंबाकू से निर्मित हो या अन्य किसी प्रकार के नशीले पदार्थों से। पुरुषोत्तम कंवर सहायक प्राध्यापक हिंदी ने कहा कि धूम्रपान सेहत के लिए अत्यंत नुकसानदेय है। तम्बाकू के सेवन से कैंसर जैसे जानलेवा बीमारी की आशंका बढ़ जाती है। अखिलेश कुमार उइके सहायक प्राध्यापक राजनीति विज्ञान ने कहा कि तंबाखू में निकोटिन नामक पदार्थ होता है जो कि मानव शरीर में कैंसर फैलाता है, इसीतरह धुम्रपान से मानव शरीर के फेफड़ों में टार बन जाता जो कि मृत्यु का कारण बनता है। इसके रोकथाम के लिए हमें अपने घर से ही शुरुवात करना होगा जैसे की हमारे बुजुर्ग इसका सेवन करते है, जिसे देख कर उनकी आने वाली पीढ़ी भी प्रभावित होती है। सबसे पहले यहीं से रोकथाम की शुरुवात होनी चाहिए । शासन,प्रशासन और सरकार को इसके लिए विशेष कदम उठाना चाहिए। रघुराज सिंह तंवर सहायक प्राध्यापक वाणिज्य ने कहा कि तम्बाकू का ये जानलेवा नशा, करता है अनमोल जीवन की दुर्दशा। हर साल 31 मई को दुनियाभर में विश्व तंबाकू निषेध दिवस आयोजन के पीछे लोगों को इससे होने वाले सेहत के नुकसान के बारे में जागरुक किया जा सके।गुलाब सिंह कंवर सहायक प्राध्यापक वाणिज्य ने कहा कि तंबाकू खाने वाले व्यक्ति में मुहं,गले या फेफड़ों का कैंसर होने की प्रबल संभावना रहती है। साथ ही तंबाकू का सेवन करने वाले व्यक्ति को फेफड़े संबंधी अन्य रोग जैसे सीओपीडी, टीबी, निमोनिया आदि का जोखिम अधिक होता है। उन्होंने आह्वान किया कि अगर आप डायबिटीज से बचे रहना चाहते हैं तो तंबाकू का सेवन आज ही छोड़ दें। बीड़ी, सिगरेट और तंबाक, स्वास्थ्य संपदा के है डाकू।

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