देवी धाम देवसागर (भटगांव )में भव्य जेवरादाई चैत राई मेला कल

देवी धाम देवसागर (भटगांव ) में भव्य जेवरादाई चैत राई मेला कल


भटगांव – नवीन जिला सारंगढ़ बिलाईगढ स्थिति नगर पंचायत भटगांव जमींदारी में अकबर शासन काल के समय से चली आ रही मां जेवरादाई (हिंगलाज माता ) की विशाल मेला लगती है । साहित्यों और भटगांव जमींदारी के इतिहास से यह ज्ञात होता है कि यहां बहुत ही सुरवीर जमींदार हुआ करते थे भटगांव जमींदारी के इतिहास में यह वर्णित है कि यहां का जमींदार गंभरसाय का भतीजा गोपाल रायमल को जेवरादाई (हिंगलाज माता) का विशेष आशीर्वाद प्राप्त था । उन्हें छत्तीसगढ़ का भीम कहा जाता है । जेवरादेई मंदिर में प्रतिवर्ष चैत पूर्णिमा को विशाल मेला लगता है यहां जो भी मन्नत मांगते है वो जरूर पूरा होता है । यहां बहुत दूर दूर से लोग मेला, देखने , देवी दर्शन करने आते है यहां कोरबा, शक्ति रायगढ़, सारंगढ़ , बिलासपुर, जांजगीर, चांपा, महासमुंद , जिले के लोग आते है इतिहास में वर्णित है कि एक बार सारंगढ़ का राजा जेवरा माता को रात में अपने राज्य सारंगढ़ ले जा रहे थे तो जेवराडीह मूल स्थान जो देवसागर के पश्चिम में स्थित है से कुछ ही दूर देवसागर पहुंचे थे और राजा का रथ का पहिया नीचे धंस गया । रात में भटगांव जमींदार को देवी ने स्वप्न दिया कि मुझे सारंगढ़ के राजा ले जा रहा है और वही सुबह हो गई । तब भटगांव के जमींदार द्वारा सेना लेकर जेवराडीह देवसागर की ओर दौड़े और सारंगढ़ के राजा देवी की वही छोड़ कर चले गए । भटगांव जमींदार ने देवी को उनके मूल स्थान जेवरडीह में पुनः चलने आग्रह किए तो देवी ने देवसागर में पहाड़ी में ही रहूंगी बोली, और मैं खुले में ही रहूंगी , इस प्रकार वहां आज तक कोई मंदिर छत नहीं है जो आज भी चली आ रही है । यहां पहली पूजा महल के द्वारा होती है मेला में पहले दिन रात को धरनाहीन धरना धरते। दूसरे दिन पूजा पश्चात बैगा द्वारा सभी को हल्दी का छींटा कर जगाते है और फिर आम जन दर्शन कर मन्नत मांगते है । मेला में विभिन्न प्रकार के दुकान ,मीना बाजार , झूला , विभिन्न प्रकार के दुकान आते है लोग मेला का आनंद लेते है। और शाम तक वापस अपने घर को वापस हो जाते है।





