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छत्तीसगढ़ में मानवता शर्मसार, बेटियों ने पिता की अर्थी को कंधा देकर पहुंचाया मुक्तिधाम, देखते रहे लोग

CG NEWS : छत्तीसगढ़ में मानवता शर्मसार, बेटियों ने पिता की अर्थी को कंधा देकर पहुंचाया मुक्तिधाम, देखते रहे लोग

ग्रैंड न्यूज़ डेस्क। CG NEWS : देश दुनिया कहां से कहां पहुंच गई। लोग अब मंगल पर भी पहुंच रहे हैं, लेकिन समाज को कलंकित करने वाली पुरानी परंपराएं और प्रथाएं अब भी जीवित हैं। इन कुरुतियों का दंश अब भी लोगों को झेलने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले से मानवता को शर्मसार करने वाली एक ऐसी ही घटना सामने आई है। समाज से परिवार को बहिष्कार करने पर सालडबरी गांव में दो बेटियों ने एक बेटे की तरह अपने पिता की अर्थी को कंधा देकर मुक्तिधाम तक पहुंचाया। इकलौते भाई के साथ मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार भी किया। हैरानी कि बात ये है कि पूरा गांव और रिश्तेदार भी तमाशबीन बनकर मंजर को देखते रहे पर किसी ने साथ नहीं दिया।

इस साल की थीम बाकि साल से बिल्कुल जुदा है. हम सभी जानते हैं कि फिलहाल की स्थिति में हमारी धरती तमाम तरह की परेशानियों से जूझ रही है. खासतौर पर प्रकृतिक समस्याएं, ऐसे में इस साल (International Youth Day 2023 की थीम तय की गई है, युवाओं के लिए हरित कौशल: एक सतत विश्व की ओर… इस साल की थीम, दुनिया में हरित परिवर्तन की ओर लगातार कदम बढ़ाते हमारे समाज को प्रदर्शित करता है।

अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस का इतिहास

1965 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने युवाओं पर प्रभाव डालने के लिए ठोस प्रयास करना शुरू किया. उन्होंने युवाओं के बीच शांति, आपसी सम्मान और लोगों के बीच समझ के आदर्शों को बढ़ावा देने की घोषणा का समर्थन किया. उन्होंने उभरते हुए नेताओं की पहचान करके और उन्हें दुनिया की जरूरतों को पूरा करने के लिए संसाधन प्रदान करके युवाओं को सशक्त बनाने के लिए समय और संसाधन समर्पित करना शुरू कर दिया।

अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस का महत्व

हर साल 12 अगस्त को दुनिया समाज को प्रभावित करने और रचनात्मक बदलाव लाने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका का जश्न मनाती है. यही अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस का मूल है. युवाओं के सामने आने वाले अवसरों और चुनौतियों के बारे में सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाने के लिए संयुक्त राष्ट्र द्वारा इस दिन को अलग रखा गया था.

 

 

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