नगर भटगांव मे धूम धाम से मनाया गया आदर्श होली का पर्व
नगर के महिलाएं, पुरुष, बच्चे एवं गणमान्य नागरिक हुए शामिल
नगर भटगांव मे धूम धाम से मनाया गया आदर्श होली का पर्व
नगर के महिलाएं, पुरुष, बच्चे एवं गणमान्य नागरिक हुए शामिल

कीर्तन मंडली के साथ रैली निकालकर नगर का भ्रमण करते होलिका दहन स्थल मे मनाया आदर्श होली
आदर्श होली पर्व मनाने हेतु दीप महायज्ञ एवं बैठक का हुआ आयोजन

भटगांव : नगर पंचायत भटगांव के लिए इस वर्ष होली का पर्व ऐतिहासिक और क्षेत्र के लिए प्रेरणा दायक व यादगार रहा जहाँ इस साल होली का पर्व आदर्श होली के रूप में नगर भटगांव में दिखाई दिया जिसमें नगर के हर मोहल्ले से पुरुष वर्ग, नारी शक्तियों ने आगे बढ़ कर उत्साह व श्रद्धा से संकीर्तन करते हुए होलिका दहन स्थल में पहुंच कर नर्सिंग भगवान की पूजा अर्चना की और परिक्रमा कर क्षेत्रवासियो व देशवासियो के लिए मंगल कामनाएं किये।

वहीँ आपसी प्रेम व सौहार्द पूर्ण वातावरण में एक दूसरे से मिलकर ग़ुलाल लगाकर एक दूसरे को शुभकामनायें दिए। ऐसा ऐतिहासिक क्षण देखने को पहली बार मिला जहाँ निश्चित रूप से यह एक आदर्श होली के रूप में प्रस्तुत हुआ।


वहीँ कार्यक्रम मे माता बहने के आगे आने से होली में होने वाली गंदी और फूहड़पन होली पर बहुत हद तक अंकुश लगा और आने वाले समय में और भी बेहतर ढंग से करने के लिए उत्साहित होते हुए क्षेत्र वासियों को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित करने का संकल्प लिया.
यह आदर्श होली महोत्सव गायत्री परिवार के नेतृत्व मे नगर अध्यक्ष विक्रम कुर्रे , उपाध्यक्ष प्रदीप देवांगन , पार्षदगण ,पुलिस प्रशासन , पत्रकार व मीडिया बंधुओं , वरिष्ठ नागरिक गण , विभिन्न मोहल्लों से आये हुए माताओं , बहनों , भाईयों , कीर्तन मंडलियों , युवक , युवतियों एवं छोटे छोटे बालक – बालिकाओं के सम्मिलित प्रयास एवं उपस्थिति में मौली माता चौक से कीर्तन भजन , फाग गीत गाते हुए नगर भ्रमण करते हुए होलिका दहन स्थल बस स्टैंड पर पहुंचकर बड़े ही धूमधाम से होली पर्व को मनाया गया.जहां भटगांव क्षेत्र के आस पास के सैकड़ों गांवों के आये हुए लोग भी शामिल हुए। आदर्श होली मनाने नगर के विभिन्न मोहल्लों से माताएं , बहनें अदम्य साहस के साथ घर से निकलकर सामने आईं ।

वहीँ मातृशक्ति , नारीशक्ति नारी तू नारायणी के वास्तविक स्वरूप का बोध समाज को कराया और कहा कि हम नारियां होली पर्व में निकलकर सामने आयेंगी । होली जैसे पावन पुनीत पर्व जहां होलिका माता , भगवान नरसिंह नाथ के भक्त – प्रहलाद का स्थान है ऐसे जीवंत एवं दिव्य तीर्थ क्षेत्र है वहां पर आकर पुरुष वर्ग , माताओं – बहनों को गंदी – गंदी गालियां देते हैं । गंदे गंदे गाना गाते हैं । अपशब्द बोलते हैं । अश्लील एवं फूहड़ता पूर्वक होली मनाते हैं । कपड़े फाड़ते हैं । कीचड़ लगाते हैं । होली पर्व पर जबरदस्ती इसे बीच में घुसा दिया गया है जो प्राचीन काल से चली आ रही गलत परम्परा , कुरीति , रुढ़िवाद है इसे खत्म करना अब हमारी बारी है । हम इसे समाप्त करके ही मानेंगी । हम ही लोग जाएंगे तभी यह खत्म होगी कहते हुए आदर्श होली मनाने में बढ़चढ़कर हिस्सा लिया और गलत परम्परा को समाप्त करने हेतु संकल्पित हुए । नगर व क्षेत्र के इतिहास में यह पहली बार है कि होलिका दहन स्थल में माताओं बहनों को जाने का मौका मिला आज उन्हें सच्चे अर्थों में आजादी मिली है । उपस्थित नारी शक्तियों ने कहा कि पहले हम इतिहास पढ़ते थे आज हम पढ़ने नही इतिहास का एक नया अध्याय लिखने आए हैं । जब जब होली त्यौहार की बात आयेगी आज के दिन को याद किया जाएगा । जो लोग भी इस पावन कार्य व क्षण में सहभागिता निभा सके वे बड़े ही सौभाग्यशाली हैं । वे सभी एक – एक योद्धा की भांति अपने संकल्प पे अडिग रहे और उन सभी ने अपनी भूमिका बखूबी निभाया है । नगर को आदर्श बनाने , गौरव गरिमा को बढ़ाने , श्रेष्ठ कार्य , होलिका दहन स्थल को तीर्थ क्षेत्र बनाने , समाज , संस्कृति के उत्थान , नारियों के सम्मान , दैवीय कार्य , महाकाल के युग प्रत्यावर्तन प्रक्रिया के लिए त्यौहार के दिन अपने व्यस्ततम गृह कार्य को त्यागकर बेश कीमती समय का किसी सद्दुदेश्य के लिए सदुपयोग किया और यह कार्यक्रम नगर वासियों के सम्मिलित प्रयास सफल रहा.



आपको बता दे कि आदर्श होली मनाने हेतु एक दिवस पूर्व दीप महायज्ञ या झांकियों के साथ रैली निकालकर सन्देश दिया जाता था जो होलिका पर्व के दिन यह संभव नहीं पाता था लेकिन सबके अथक प्रयास से इस वर्ष होली पर्व के दिन ही सभी वर्गों के महिला, पुरुष, बच्चे व सभी जाति समाज के लोग सम्मिलित होकर आदर्श होली बड़े धूम धूम ही धूमधाम से मनाया.जिसके लिए 1-2 दिन पूर्व ब्राह्मण पारा एवं मौली माता चौक मे दीप महायज्ञ के आयोजन व बैठक के साथ नगरवासियो को आदर्श होली मनाने के लिए प्रेरित किया गया तत्पश्चात पुरे नगर पंचायत अध्यक्ष,उपाध्यक्ष व पार्षदगणों की सहभागिता आदर्श होली मनाने हेतु मुनादी भी कराई गई थी।










