श्री गायत्री प्रज्ञापीठ पवनी, भटगांव, धनसिर, छिर्रा एवं जिले के विभिन्न प्रज्ञा संस्थानों मे हिंदी नववर्ष एवं चैत्र नवरात्र के अवसर पर अखंड दीपक का पूजन व स्थापना
जिले में सैकड़ो गायत्री परिजन एवं श्रद्धालुगण आत्म कल्याण, विश्वकल्याण व विश्व शांति के लिए कर रहे हैं गायत्री साधना व गायत्री महामंत्र का 9 दिवसीय जप अनुष्ठान

श्री गायत्री प्रज्ञापीठ पवनी, भटगांव, धनसिर, छिर्रा एवं जिले के विभिन्न प्रज्ञा संस्थानों मे हिंदी नववर्ष एवं चैत्र नवरात्र के अवसर पर अखंड दीपक का पूजन व स्थापना
जिले में सैकड़ो गायत्री परिजन एवं श्रद्धालुगण आत्म कल्याण, विश्वकल्याण व विश्व शांति के लिए कर रहे हैं गायत्री साधना व गायत्री महामंत्र का 9 दिवसीय जप अनुष्ठान

सारंगढ़ बिलाईगढ़ : जिले के नगर पंचायत पवनी में आस्था,आध्यात्म और धार्मिक अनुष्ठान के लिए प्रसिद्ध गायत्री प्रज्ञापीठ मे हिंदी नववर्ष एवं चैत्र नवरात्र के अवसर पर तीन घृत का अखंड दीपक का पूजन स्थापन किया गया। जो लगातार राम नवमी तक जलते रहेगा। इस अवसर पर नगर के युवाओं द्वारा गायत्री मंत्र लेखन एवं प्रति दिन सामूहिक गायत्री मंत्र के जप करने हेतु संकल्पित हुए.


अखंड दीपक जलाने के कारण एवं फायदे – अखंड दीप (अखंड ज्योति) जलाने से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, सुख-समृद्धि बढ़ती है, और नकारात्मकता या बुरी शक्तियां दूर रहती हैं। यह मां दुर्गा एवं माँ गायत्री की कृपा, पारिवारिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक है। वास्तु दोषों को कम करने और ग्रहों (राहु-केतु, शनि) के बुरे प्रभावों को शांत करने के लिए भी यह बेहद शुभ माना जाता है।



वहीँ आपको बता दे कि प्रत्येक चैत्र नवरात्रि एवं शारदीय नवरात्रि में सैकड़ो गायत्री परिजन एवं श्रद्धालुगण सभी प्रज्ञा संस्थानों में आत्मकल्याण, विश्व कल्याण एवं विश्व शांति के लिए अखंड दीप प्रज्वलित करके 9 दिवसीय साधना 24000 मंत्रो का सामूहिक जप, नित्य गायत्री चालीसा एवं गायत्री मंत्र लेखन करते हैं. सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिले में 19 प्रज्ञा पीठ, चरण पीठ एवं शक्तिपीठ है जहाँ प्रतिदिन, साप्ताहिक एवं विशेष पर्व में गायत्री महायज्ञ का आयोजन एवं वार्षिक आयोजन किये जाते है जहाँ विभिन्न 16 संस्कार निःशुल्क भी कराये जाते हैं. वहीँ नवरात्री के नवमी क़ो 3 कुण्डीय या 5 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ के साथ पूर्णाहुति देकर अनुष्ठान का समापन किया जाता है जहाँ सभी प्रज्ञा संस्थानों में सैकड़ो परिजन एवं आसपास के श्रद्धालुगण कार्यक्रम में सम्मिलित होते है.

बिलाईगढ़ ब्लॉक् में मुख्य रूप से 4 गायत्री प्रज्ञा पीठ है जो भटगांव, पवनी, छिर्रा एवं धनसिर में 1981 में अखिल विश्व गायत्री परिवार के संस्थापक, युग ऋषि तपोनिष्ठ पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के कर कमलों से भूमिपूजन कर स्थापित किया गया था जहाँ गुरुदेव के चरण कमल की रज एवं प्रभाव आपको देखने क़ो मिलेगा और आपको गुरुदेव का अनुभव करने क़ो मिलेगा.

श्री गायत्री शक्ति पीठ सारंगढ़ में प्रतिदिन गायत्री यज्ञ एवं विभिन्न संस्कार कराये जाते है जहाँ का वातावरण एवं ऊर्जा का प्रभाव महसूस किया जाता है.बरमकेला, सरिया सहित 19 स्थानों में माँ गायत्री एवं गुरुदेव की कृपा बरसती है जहाँ गायत्री परिजन व श्रद्धालुगण प्रतिदिन आशीर्वाद प्राप्त कर अपने एवं परिवार का कल्याण कर रहे है.यह क्रम छत्तीसगढ़, भारत सहित विश्व के सभी प्रज्ञा संस्थानों में संचालित है जिसका केंद्र बिंदु शांतिकुंज हरिद्वार एवं गायत्री तपोभूमि मथुरा है जिसके निर्देशानुसार लोकहित में विभिन्न कार्य भी किये जाते है जैसे सप्त क्रांति, वृक्षारोपण, विभिन्न सोलह संस्कार, नशा मुक्ति अभियान, पर्यावरण सरंक्षण, सामाजिक कार्य, युवा एवं महिला जागरण शिविर, भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा, बाल संस्कार शाला, योग प्राणायाम, स्वच्छता अभियान रोजगार एवं स्वरोजगार सम्बंधित प्रशिक्षण, गीत संगीत प्रशिक्षण इत्यादि कार्यक्रम समय अनुसार आयोजित किये जाते हैं.






